इंदौर में डॉक्टरों की एक 25 वर्षीय महिला के कंधे के पास 5 इंच का बड़ा ट्यूमर निकालकर उसे नई जिंदगी दी है। यह सर्जरी 5 घंटे तक चली। ट्यूमर ने कंधे से लगी हड्डी को काफी नष्ट कर दिया था और फेफड़ों के पास नसों से चिपक गया था जो कैंसर में तब्दील हो सकता था
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मामला सीहोर की महिला का है जिसके तीन छोटे बच्चे हैं। उसके बाएं कंधे की हंसली की हड्डी (कॉलर बोन/क्लैविकल) में करीब 12 सेंटीमीटर का ट्यूमर था। यह ट्यूमर कई सालों से धीरे-धीरे बढ़ रहा था। इससे उन्हें कंधे में तेज दर्द, हाथ उठाने में कठिनाई और मांसपेशियों में लगातार कमजोरी महसूस हो रही थी। महिला ने पहले कई अस्पतालों में दिखाया गया, लेकिन ट्यूमर की जटिलता और दुर्लभता के कारण इलाज नहीं मिल सका।
कंधे के पास था यह बड़ा ट्यूमर।
इस पर उसने पिछले माह इंदौर के इंडेक्स अस्पताल में डॉक्टरों को दिखाया। जांच रिपोर्ट में पता चला कि ऑस्टियोकोंड्रोमा नामक ट्यूमर ने कॉलर बोन के लगभग दो-तिहाई हिस्से को नष्ट कर दिया था। यह ट्यूमर नीचे फेफड़ों से सटी ब्रैकियल प्लेक्सस (नसों का जाल) और खून की खास नसों से चिपका हुआ था। इस तरह का ट्यूमर भविष्य में कैंसर में परिवर्तित हो सकता है।
सर्जरी में खून की नसों को रखा सुरक्षित मामले में परिजन की सहमति के बाद 15 दिन पूर्व उसकी सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान नसों और खून की आर्टरीज को सुरक्षित रखते हुए आगे कोराकॉयड प्रोसेस और पीछे स्कैप्यूला से चिपकी गांठ को ऑस्टियोटोमी तकनीक द्वारा अलग किया गया। सर्जरी के अगले ही दिन मरीज ने कंधे को 90 डिग्री तक उठाना शुरू कर दिया।

सफल सर्जरी करने वाली डॉक्टरों की टीम।
आयुष्मान योजना में फ्री में हुआ इलाज यह सर्जरी एनेस्थीसिया विभाग की प्रो. डॉ. संगीता बंसल के सहयोग से लगभग 5 घंटे तक चली और ट्यूमर निकाल लिया गया। ऑपरेशन में प्रो. डॉ. अभय मनचंदा के साथ डॉ. ज़ैनुल, डॉ. कायथवाल, डॉ. शौर्य डॉ. अखिलेश का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। यह सर्जरी आयुष्मान भारत योजना का निःशुल्क हुई। प्रो. डॉ. अभय मनचंदा ने बताया कि ऑन लाइन और चिकित्सा साहित्य में इस प्रकार के ट्यूमर का कोई स्पष्ट रिपोर्टेड मामला सामने नहीं आया।
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