एक ही रात में 13 घंटे अंधेरा, साल में सिर्फ एक बार होता ये अनोखा, जानें कारण

एक ही रात में 13 घंटे अंधेरा, साल में सिर्फ एक बार होता ये अनोखा, जानें कारण


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21 दिसंबर को उज्जैन में साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात होती है, जिसे शीतकालीन अयनांत कहते हैं. पंडित आनंद भारद्वाज ने इसे खगोलीय रूप से खास बताया.

उज्जैन. दिसंबर का महीना ठंड के साथ-साथ एक बेहद खास खगोलीय बदलाव भी लेकर आता है. इस महीने एक ऐसा दिन आता है, जब लोगों को लगता है कि रात खत्म ही नहीं हो रही है. अंधेरा देर तक छाया रहता है और दिन बहुत जल्दी बीत जाता है. सुबह होने के कुछ ही घंटों बाद शाम का एहसास होने लगता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इस दिन रात बहुत लंबी और दिन साल का सबसे छोटा होता है. इस अनोखी घटना को लेकर लोकल 18 की टीम ने जब उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित आनंद भारद्वाज से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यह बदलाव हर साल 21 दिसंबर को देखने को मिलता है. इस दिन को खगोलीय दृष्टि से बेहद खास माना जाता है.

साल 2025 का सबसे छोटा दिन
पंडित आनंद भारद्वाज के अनुसार, 21 दिसंबर को सूर्य की स्थिति में बड़ा बदलाव होता है. इस दिन सूर्य ऐसी स्थिति में होता है, जिससे वह कम समय के लिए दिखाई देता है. इसी कारण 21 दिसंबर साल का सबसे छोटा दिन और सबसे लंबी रात वाला दिन होता है. उज्जैन में इस दिन दिन की अवधि करीब 10 घंटे के आसपास रहती है, जबकि रात करीब 13 घंटे से ज्यादा लंबी होती है. यानी दिन और रात के समय में करीब साढ़े तीन घंटे का अंतर साफ दिखाई देता है. उन्होंने बताया कि साल 2025 में 21 दिसंबर को उज्जैन में सूर्योदय लगभग सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त करीब शाम 5 बजकर 40 मिनट पर होगा. यही वजह है कि इस दिन दिन बहुत छोटा लगता है और शाम जल्दी ढल जाती है.

कौन से चार दिन मे होती है यह खगोलीय घटना
उन्होने बताया, पंचांग की गणना में 21 दिसंबर का विशेष महत्व है. साल में कुल 365 दिन होते हैं और आमतौर पर हर दिन 24 घंटे का होता है, लेकिन साल में चार दिन ऐसे होते हैं जो खगोलीय रूप से बहुत खास माने जाते हैं. इनमें 21 मार्च, 21 जून, 23 सितंबर और 21 दिसंबर शामिल हैं. 21 जून को दिन सबसे लंबा होता है, जबकि 21 दिसंबर को रात सबसे लंबी होती है. वहीं 21 मार्च और 23 सितंबर को दिन और रात की अवधि लगभग बराबर रहती है.

आखिर क्यों होती है इस दिन से रात लंबी
21 दिसंबर को होने वाली इस घटना को शीतकालीन अयनांत कहा जाता है. इस दिन पृथ्वी की धुरी झुकी हुई होने के कारण सूर्य की किरणें सीधे मकर रेखा पर पड़ती हैं. इसकी वजह से उत्तरी गोलार्ध में सूर्य कम समय के लिए दिखाई देता है और रात लंबी हो जाती है. सूर्य का दक्षिणायन हर साल जून के महीने में शुरू होता है, जब दिन धीरे-धीरे छोटे होने लगते हैं. दिसंबर में यह प्रक्रिया अपने चरम पर पहुंचती है. इसके बाद जनवरी के महीने में मकर संक्रांति के आसपास सूर्य उत्तरायण में प्रवेश करता है. तब धीरे-धीरे दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं. इस तरह 21 दिसंबर न सिर्फ खगोलीय रूप से, बल्कि धार्मिक और पंचांग की दृष्टि से भी एक बेहद महत्वपूर्ण दिन माना जाता है.

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Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें

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