Goat Farming Tips: मध्य प्रदेश के सीधी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों के किसान बड़े पैमाने पर बकरी पालन करते हैं. बकरी पालन पशुपालकों के लिए एक बेहतर विकल्प है. क्योंकि, इसमें कम पूंजी में अधिक लाभ कमाया जा सकता है. यही वजह है कि अब बड़ी संख्या में लोग चयनित डोज बकरियों में डालकर वैज्ञानिक तरीके से प्रजनन पर ध्यान दे रहे हैं, ताकि उत्पादन और आमदनी दोनों बढ़ाई जा सके.
सीधी जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ. सलिल कुमार पाठक ने लोकल 18 को बताया, बकरी पालन में सफलता का सबसे अहम पहलू गर्भवती और दूध देने वाली बकरियों की सही देखभाल है. डॉक्टर ने कहा, ठंड में समस्याएं ज्यादा बढ़ जाती हैं, क्योंकि इसी समय अधिकांश बकरियां बच्चों को जन्म देती हैं. कई पशुपालक इस दौरान बकरियों को सिर्फ चरने के लिए छोड़ देते हैं, जबकि उन्हें विशेष दाना, मिनरल मिक्स और प्रोटीनयुक्त आहार की सख्त जरूरत होती है.
14 दिन तक ये दवा जरूरी
डॉ. पाठक के अनुसार, पोषण की कमी के कारण प्रसव के बाद बकरियों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं और कई बार उनका पिछला हिस्सा उठ नहीं पाता. इसलिए गर्भवती और दूध देने वाली बकरियों को संतुलित दाना, मिनरल मिक्स और साफ पानी नियमित रूप से देना बहुत जरूरी होता है. साथ ही CDT, PPR और FMD जैसे जरूरी टीके समय पर लगवा देना चाहिए, ताकि गंभीर बीमारियों से बचाव हो सके, प्रसव के 14 दिन बाद कृमिनाशक दवा देना भी अनिवार्य है.
पैदा होते ही बच्चे को दें ये चीज
डॉक्टर के अनुसार, इस समय निमोनिया नवजातों के लिए सबसे बड़ा खतरा बनता है. ठंडी हवा और नमी उनकी जान तक ले सकती है. ऐसे में बकरी के शेड को गर्म, सूखा और हवा से सुरक्षित रखना जरूरी है. बच्चा पैदा होते ही उसे मां का पहला दूध यानी कोलोस्ट्रम जरूर पिलाना चाहिए, क्योंकि यही उसकी इम्यूनिटी की पहली ढाल होती है. यदि बच्चे का वजन लगभग एक किलो है, तो उसे दिन में तीन से चार बार 100 से 125 ग्राम दूध देना बहुत जरूरी है.
इतने दिन बाद दें हरी पत्तियां
डॉक्टर के अनुसार 18-20 दिन बाद बच्चों को हरी पत्तियां और एक महीने की उम्र में पिसा हुआ दाना देना शुरू कर देना चाहिए. तीन महीने का होने पर बच्चों का टीकाकरण अनिवार्य रूप से कराना चाहिए. सीधी जिले में ब्लैक बंगाल, बरबरी, जमुनापारी, बीटल और सिरोही नस्ल की बकरियों का पालन बड़े पैमाने पर किया जा रहा है.
बकरी का दूध बेहद उपयोगी
वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. आरपी परौहा का कहना है कि बकरी का दूध बच्चों के लिए बेहद फायदेमंद होता है. बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है. यही कारण है कि बकरी पालन सीमित पूंजी वाले किसानों के लिए आत्मनिर्भर बनने का मजबूत माध्यम बन रहा है.