Wheat Farming: खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि गेहूं में खरपतवार एक ऐसी समस्या है, जो फसल के साथ ही उगने लगती है. ये जंगली पौधे मिट्टी से पोषक तत्व सोख लेते हैं, जिससे गेहूं की ग्रोथ रुक जाती है और पौधे कमजोर पड़ जाते हैं. उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ता है. गेहूं की बुवाई के 30 से 35 दिन की अवस्था खरपतवार नियंत्रण के लिए सबसे उपयुक्त रहती है. बाजार में उपलब्ध उन्नत दवाइयां जैसे क्लोबेनफार्म 15% और मेटसल्फ्यूरॉन 1% (वेस्टा) को 400 ग्राम प्रति हेक्टेयर (या 160 ग्राम प्रति एकड़) की मात्रा में छिड़कना चाहिए. इस अवधि में खरपतवार का आकार छोटा होता है और दवा जल्दी असर दिखाती है.