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Khargone Top Five Hanuman Mandir : पवनपुत्र हनुमान जी के भक्त देश-विदेश में करोड़ों की संख्या में हैं. नए साल की शुरुआत अगर बजरंगबली के दर्शन से हो, तो इसे बेहद शुभ माना जाता है. खरगोन जिले में स्थित ये पांच हनुमान मंदिर अपनी प्राचीनता, चमत्कार और विशेष मान्यताओं के कारण न सिर्फ जिले बल्कि पूरे प्रदेश में प्रसिद्ध हैं.
खरगोन शहर के बुरहानपुर दरवाजे के पास स्थित यह मंदिर करीब 350 साल पुराना है. यहां गर्भगृह में महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है, जो इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाता है. महिलाएं इसे अपने भाई का घर मानती हैं. मंदिर में तीन मुखी हनुमान जी विराजित हैं, जिनके पैरों के नीचे राक्षस दबा हुआ है. मान्यता है कि हनुमान जी के बाएं पैर का सिंदूर लगाने से बाधाएं दूर होती हैं और शत्रु शांत हो जाते हैं.

कुंदा नदी के तट पर श्री संकट मोचन हनुमान मंदिर लगभग 360 वर्ष पुराना बताया जाता है. यहां हनुमान जी युवा अवस्था में विराजमान हैं. उनकी तेजस्वी प्रतिमा श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है. कूदा में कई बार बाढ़ आई, मंदिर पूरा डूब गया, लेकिन मूर्ति को आजतक कोई नुकसान नहीं हुआ. लोग इसे भगवान का चमत्कार मानते है. मान्यता है कि यहां आटे का दिया जलाने से जीवन के संकट दूर हो जाते हैं. हर दिन बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

शहर के नूतन नगर में स्थित दाता हनुमान मंदिर करीब 90 साल पुराना है. कहा जाता है कि हनुमान जी की प्रतिमा कसरावद से घट्टी गांव ले जाई जा रही थी, लेकिन यहां पीपल के नीचे रखने के बाद प्रतिमा यहीं स्थिर हो गई. आठ दिन बाद भी प्रतिमा नहीं हिली, जिसके बाद यहीं मंदिर बना दिया गया. यहां हनुमान जी दिन में तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देते हैं.
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शहर के BTI रोड पर स्थित सार्वजनिक हनुमान मंदिर करीब 125 साल पुराना है. इसकी खासियत यह है कि मंदिर की नींव समाधियों पर रखी गई है. आसपास आज भी कई प्राचीन समाधियां मौजूद हैं. वर्तमान में कई लोग इसे घंजका हनुमान मंदिर के नाम से भी जानते है. यहां हनुमान जी बैठे हुए स्वरूप में विराजित हैं. एक हाथ में गदा और पूंछ सिर के ऊपर घूमी हुई दिखाई देती है. भक्त इसे सिद्ध स्थल मानते हैं.

जिले के बड़वाह क्षेत्र के अखिलेश्वर धाम का हनुमान मंदिर पूरे विश्व में प्रसिद्ध है. यहां रुद्रावतार हनुमान जी की दुर्लभ प्रतिमा है, जिनके एक हाथ में शिवलिंग है. जबकि सामान्यतः हनुमान जी के हाथ में द्रोणागिरि पर्वत दर्शाया जाता है. कहते है कि, ऐसा स्वरूप पूरी दुनिया में ओर कही नहीं है. मान्यता है कि राम-रावण युद्ध से पहले रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना से पहले हनुमान जी यहां रुके थे. यह स्थल द्वापर काल से जुड़ा बताया जाता है और यहां तीन प्राचीन शिलालेख भी मौजूद हैं.