पूर्व सैनिक की अनोखी पहल, युवाओं को दे रहे फ्री में आर्मी, पुलिस की ट्रेनिंग

पूर्व सैनिक की अनोखी पहल, युवाओं को दे रहे फ्री में आर्मी, पुलिस की ट्रेनिंग


खंडवाः जिले से एक सैनिक की सराहनीय पहल सामने आई है, जहां एक पूर्व सैनिक युवाओं को निःशुल्क आर्मी और पुलिस की फिजिकल ट्रेनिंग दे रहा हैं. इस प्रशिक्षण के जरिए अब तक 500 से ज्यादा युवा सेना और पुलिस में चयनित होकर देश सेवा के लिए आगे बढ़ चुके हैं. खंडवा के रहने वाले पूर्व सैनिक अनिल पाटिल जय हिंद डिफेंस ग्रुप के नाम से यह प्रशिक्षण चला रहे हैं. खास बात यह है कि यहां युवाओं से किसी भी तरह की फीस नहीं ली जाती. सुबह-सुबह कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया जाता है.

युवाओं को दे रहे प्रशिक्षण

Local 18 से बातचीत में अनिल पाटिल बताते हैं कि वे 31 मई 2019 को सेना से सेवानिवृत्त हुए. रिटायरमेंट के बाद जब वे खंडवा लौटे, तो उन्होंने देखा कि निमाड़ क्षेत्र के युवाओं में काबिलियत तो है, लेकिन सही मार्गदर्शन की कमी है. इसी सोच के साथ उन्होंने कुछ बच्चों को ट्रेनिंग देना शुरू किया, जो आज एक बड़ा कारवां बन चुका है. अनिल पाटिल बताते हैं कि शुरुआत में उनके पास सिर्फ 5 बच्चे आए थे, लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती गई.

वर्ष 2019 से अब तक उनके मार्गदर्शन में 350 से ज्यादा युवा सेना और पुलिस में चयनित हो चुके हैं. पिछली अग्निवीर भर्ती में भी 22 युवाओं का चयन हुआ है. वर्तमान में चल रही पुलिस भर्ती के लिए 300 से अधिक युवा प्रशिक्षण ले रहे हैं. यह ट्रेनिंग रोजाना सुबह 4 बजे से 7 बजे तक खंडवा के गुरु नानक स्टेडियम में दी जाती है. यहां न सिर्फ फिजिकल तैयारी कराई जाती है, बल्कि युवाओं में अनुशासन और देश सेवा का जज्बा भी पैदा किया जाता है.

90 के दशक के युद्ध से मिली प्रेरणा

अनिल पाटिल बताते हैं कि वे खुद एक गरीब परिवार से आते हैं. उनके पिता मजदूर वर्ग से थे, जिन्होंने कड़ी मेहनत कर उन्हें पढ़ाया-लिखाया. सेना में जाने की प्रेरणा उन्हें 90 के दशक के युद्ध के समय मिली, जब उन्होंने सैनिकों के सम्मान और देश सेवा का महत्व देखा. उसी समय उन्होंने सेना में जाने का फैसला किया और पहली ही कोशिश में उनका चयन हो गया.

अनिल पाटिल कहते हैं कि सेना में रहते हुए उन्होंने महसूस किया कि हरियाणा, पंजाब, राजस्थान जैसे राज्यों से ज्यादा युवा चयनित होते हैं, जबकि मध्य प्रदेश और निमाड़ क्षेत्र से बहुत कम. यही बात उनके मन में बैठ गई और उन्होंने तय किया कि वे अपने क्षेत्र के युवाओं को आगे बढ़ने का मौका देंगे. वे बताते हैं कि कई लोगों ने उनसे फीस लेने या इसे व्यवसाय बनाने की सलाह भी दी, लेकिन उन्होंने साफ मना कर दिया। उनका कहना है कि उन्हें पैसों से ज्यादा देश सेवा से लगाव है. वे शिक्षा को बेचने में नहीं, बल्कि बांटने में विश्वास रखते हैं.



Source link