रासायनिक खेती छोड़ी, उगा दी ‘सोने’ जैसी जैविक तुअर! 200 रुपये किलो बिक रही इस किसान की फसल

रासायनिक खेती छोड़ी, उगा दी ‘सोने’ जैसी जैविक तुअर! 200 रुपये किलो बिक रही इस किसान की फसल


जैविक खेती से मुनाफा: मध्य प्रदेश में अब किसान धीरे-धीरे रासायनिक खेती से दूरी बनाकर प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर बढ़ रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह है कम खर्च, ज्यादा उत्पादन और बाजार में बेहतर दाम. खंडवा जिले के आनंदपुर खेगांव के किसान ललित शंकर पाटिल ने यह साबित कर दिखाया है कि अगर खेती प्रकृति के साथ की जाए, तो मुनाफा भी बढ़ता है और सेहत भी बचती है.

2020 से शुरू की गो-आधारित प्राकृतिक खेती
LOCAL 18 से बातचीत में ललित शंकर पाटिल बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2020 से गो आधारित प्राकृतिक खेती शुरू की. तब से वे तुअर, गेहूं, प्याज, अदरक और हल्दी जैसी फसलें पूरी तरह जैविक तरीके से उगा रहे हैं. तुअर की फसल में उन्होंने घनजीवामृत (गाय के गोबर से बनी प्राकृतिक दवा) का उपयोग किया. इसके साथ हर 15 दिन में दशपर्णी अर्क, नीमास्त्र और नीम तेल का छिड़काव किया गया.

बिना दवा के भी नहीं आई बीमारी
किसान बताते हैं कि शुरुआत में तुअर में भरपूर कलियां आईं, लेकिन उनकी जैविक फसल में कोई बड़ी बीमारी नहीं लगी. अगर कभी हल्की समस्या आई भी, तो गोमूत्र से उसका अच्छा नियंत्रण हो गया. रासायनिक दवाओं की जरूरत ही नहीं पड़ी.

स्वाद, पोषण और दाम तीनों में आगे जैविक तुअर
ललित पाटिल कहते हैं कि जैविक तुअर और रासायनिक तुअर में जमीन-आसमान का फर्क होता है. जैविक तुअर स्वाद में मीठी होती है, इसमें आयरन और प्रोटीन ज्यादा होता है, सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद होती है.

यही वजह है कि उनकी जैविक तुअर 200 रुपये किलो तक बिक जाती है, जबकि रासायनिक तुअर बाजार में 140–150 रुपये किलो मिलती है. वे अपनी फसल मंडी या व्यापारी को न देकर सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाते हैं.

रासायनिक भोजन बन रहा बीमारियों की जड़
किसान का मानना है कि आज कैंसर और हार्ट अटैक जैसी बीमारियों की बड़ी वजह रासायनिक खाद, यूरिया, डीएपी और कीटनाशक स्प्रे हैं. अगर इंसान अपने परिवार के लिए कमाता है, तो उसे शुद्ध और पौष्टिक भोजन भी देना चाहिए, जो सिर्फ प्राकृतिक खेती से ही संभव है.

15 किसानों का जैविक समूह, मुफ्त प्रशिक्षण
खंडवा में ललित पाटिल के साथ 15 किसानों का एक ग्रुप है, जो पूरी तरह शुद्ध ऑर्गेनिक खेती करता है. अगर कोई किसान गो आधारित प्राकृतिक खेती सीखना चाहता है, तो वे मुफ्त प्रशिक्षण देने को तैयार हैं.
संपर्क: +91 88896 69400



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