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Chickpea Farming Tips: रबी सीजन में चना की खूब खेती की जाती है. लेकिन, बुवाई के 70 दिन बाद फसल में एक कीड़ा लगता है, जिससे पहले एक-दो पेड़ सूखते हैं. किसानों ने इसे नजरअंदाज किया तो पूरा खेत सूख जाता है. जानें बचाव…
Agri Tips: चना रबी सीजन में गेहूं के बाद दूसरी प्रमुख फसल है. क्योंकि, इसमें लागत कम और मुनाफा ज्यादा है. इस साल भी मध्य प्रदेश के खरगोन में करीब 1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में किसानों ने चना लगाया है. लेकिन, कई बार एक छोटी-सी लापरवाही पूरी मेहनत पर पानी फेर देती है. चना की फसल में लगने वाला उग्रा रोग ऐसा ही खतरनाक रोग है, जो सही समय पर ध्यान न देने पर हरी-भरी फसल को अचानक सुखा देता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि यह रोग खासतौर पर बुवाई के करीब 70–75 दिन बाद ज्यादा फैलता है, इसलिए इस समय किसानों को खास सतर्क रहने की जरूरत होती है. जब चना फसल में फूल आकर घेटे बनने लगते हैं, उसी समय उग्रा रोग का खतरा सबसे ज्यादा रहता है. इस दौरान अगर खेत में ज्यादा पानी दे दिया जाए या जल निकासी ठीक न हो तो रोग तेजी से फैल जाता है. कई किसान इसे सामान्य सूखना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ ही दिन में पूरा खेत चपेट में आ सकता है. तब भारी नुकसान होगा.
क्या है उग्रा रोग और कब बढ़ता है खतरा?
खरगोन के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. जीएस कुलमी बताते हैं कि उग्रा रोग, जिसे विल्ट या उक्ता रोग भी कहते हैं, यह एक तरह का फंगल रोग है, जो जड़ों और तने को अंदर से कमजोर कर देता है. इसका असर बवाई के 70-75 दिन बाद ज्यादा देखने को मिलता है. इस समय पौधे में घेटे बन रहे होते हैं और अगर मौसम में नमी ज्यादा हो जाए या खेत में पानी रुक जाए, तो यह रोग तेजी से पनपता है. समय पर नियंत्रण न किया जाए तो पूरी फसल बर्बाद हो सकती है.
उग्रा रोग के लक्षण
इस रोग की सबसे बड़ी पहचान यह है कि पौधा बिना पीला पड़े ही अचानक सूखने लगता है. शुरुआत में खेत में इक्का-दुक्का पौधे सूखते दिखते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह पूरे खेत में फैल सकता है. घेटे बनने के समय इसका असर सबसे ज्यादा दिखाई देता है. विशेषज्ञ मानते हैं कि जरूरत से ज्यादा सिंचाई करने पर उग्रा रोग और तेजी से बढ़ता है.
सिंचाई में बरतें सावधानी
उग्रा रोग से बचाव में सही सिंचाई सबसे अहम भूमिका निभाती है. किसानों को चना की फसल में जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए. पहली सिंचाई बुआई के करीब 30–35 दिन बाद करें. दूसरी सिंचाई 70–75 दिन के आसपास की जा सकती है, लेकिन फूल और घेटा बनने की अवस्था में सिंचाई बिल्कुल न करें. इस समय पानी देने से रोग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.
उग्रा रोग का सही तरीका से नियंत्रण
अगर खेत में उग्रा रोग के लक्षण दिखने लगें, तो तुरंत कदम उठाना जरूरी है. खड़ी फसल में यूरिया की टॉप ड्रेसिंग बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे रोग और बढ़ सकता है. नियंत्रण के लिए मेटालेक्जिल और मैनकोजेब दवा 30 ग्राम प्रति पंप की दर से छिड़काव करें. दवाई का छिड़काव इस तरह करें कि पौधे की जड़ और तना अच्छे से कवर हो जाए, ताकि ज्यादा नुकसान न हो.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें