झाबुआ जिले के बामनिया स्थित भील आश्रम में मामा बालेश्वर दयाल की 27वीं पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई गई। कड़ाके की ठंड के बावजूद मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात से हजारों अनुयायी अपने आराध्य को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। पूरा क्षेत्र श्रद्धालुओं
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समाधि पर पुष्प अर्पित कर किया नमन
श्रद्धालुओं ने मामाजी की समाधि पर पुष्प अर्पित किए और उन्हें याद किया। हजारों महिला और पुरुष अनुयायी एक दिन पहले ही बामनिया पहुंच गए थे। ठहरने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के बावजूद लोगों ने खुले आसमान के नीचे रात बिताई और भजन-कीर्तन करते रहे। इस दौरान आश्रम परिसर और आसपास मेले जैसा दृश्य देखने को मिला।
अव्यवस्थाओं को लेकर उठा सवाल
जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रदेश अध्यक्ष सूरज जायसवाल ने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब हजारों लोगों के आने की पहले से जानकारी थी, तो पानी, सड़क और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। उन्होंने भील आश्रम की ओर जाने वाले रास्ते और व्यवस्थाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
विकास के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात की बात
सूरज जायसवाल ने कहा कि वे क्षेत्र के विकास और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों को लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात करेंगे, ताकि बामनिया और आसपास के इलाकों में बेहतर सुविधाएं विकसित की जा सकें।

आदिवासी उत्थान के प्रतीक थे संत
मामाजी के पुराने सहयोगी भेरूसिंह डामोर ने बताया कि मामा बालेश्वर दयाल ने कठिन परिस्थितियों में आदिवासी समाज के उत्थान के लिए संघर्ष किया। उनके कामों के कारण आज लोग उन्हें देवता के रूप में पूजते हैं। हिंद मजदूर सभा के प्रदेश अध्यक्ष हरिओम सूर्यवंशी ने कहा कि मामाजी की लोकप्रियता सिर्फ एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रही, बल्कि दूर-दूर तक फैली हुई है।
‘भारत रत्न’ देने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान
इस अवसर पर मामा बालेश्वर दयाल को मरणोपरांत ‘भारत रत्न’ देने की मांग को लेकर एक बड़ा हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया गया। इस अभियान में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर मामाजी को देश का सर्वोच्च सम्मान दिलाने की मांग की।