सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के फैसले को पलटते हुए महत्वपूर्ण फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वसीयत के आधार पर राजस्व न्यायालय सरकारी रिकॉर्ड में नामांतरण कर सकते हैं।
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शीर्ष अदालत ने माना कि वसीयत के आधार पर राजस्व अभिलेखों में परिवर्तन किए जाने को लेकर अर्जी दायर होती है। उसमें परिवार के लोगों की आपत्ति नहीं है तो नामांतरण किया जा सकता है। कोई तीसरा पक्ष आपत्ति दर्ज कराता है तो उसके कोई खास मायने नहीं हैं।
दरअसल, तहसीलदार के समक्ष ताराचंद ने उसके पिता रोड़मल की मृत्यु (6 नवंबर 2019 को) हो जाने पर संपत्ति अपने नाम किए जाने के लिए अर्जी दायर की थी। रोड़मल ने 1 मई 2017 को वसीयत लिखते हुए बेटे को उत्तराधिकारी बनाया था। इस अर्जी पर परिवार के किसी सदस्य ने आपत्ति नहीं ली। जबकि किसी बाहरी व्यक्ति ने अपना दावा जताते हुए नामांतरण नहीं किए जाने की आपत्ति दर्ज कराई थी।