बैतूल जिले में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन गई है। तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाने के कारण हर साल सैकड़ों लोग अपनी जान गंवा रहे हैं। इस वर्ष जनवरी से अक्टूबर तक जिले में कुल 847 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 327 लोगों की मौ
.
आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में 918 सड़क हादसे हुए थे, जिनमें 286 लोगों की जान गई और 1081 लोग घायल हुए। वहीं, 2024 में अब तक 925 मामले सामने आए हैं, जिनमें 352 लोगों की मौत हुई और 911 लोग घायल हुए हैं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि सड़क हादसों का सिलसिला लगातार जारी है।
अधिकांश दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर जिले में अधिकांश दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों पर हो रही हैं। तेज गति से वाहन चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना और अंधे मोड़ों पर कम दृश्यता इन हादसों के प्रमुख कारण हैं। पुलिस द्वारा विभिन्न स्थानों पर संकेतक लगाए जाने के बावजूद, वाहन चालक अक्सर नियमों की अनदेखी कर तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं, जिससे टक्करें होती हैं।
दोपहिया वाहनों से जुड़े हादसों में होने वाली अधिकांश मौतें हेलमेट न पहनने के कारण होती हैं। दुर्घटनाओं में गंभीर सिर की चोटें लगने से लोगों की जान जा रही है। यातायात पुलिस द्वारा चालानी कार्रवाई के दौरान चालकों को हेलमेट पहनने की सलाह दी जाती है, लेकिन कई लोग चालान भरने के बाद भी इन नियमों को भूल जाते हैं।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने CPR की ट्रेनिंग दी बढ़ते सड़क हादसों को देखते हुए, शुक्रवार को यातायात पुलिस बैतूल ने ऑडिटोरियम में वाहन चालकों के लिए एक यातायात जागरूकता शिविर का आयोजन किया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा, यातायात नियमों के पालन और हेलमेट व सीट बेल्ट के महत्व के प्रति जागरूक करना था।
शिविर के दौरान जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने CPR (कार्डियो पल्मोनरी रीससिटेशन) की ट्रेनिंग दी। इसका लक्ष्य था कि वाहन चालक किसी दुर्घटना की स्थिति में घायल व्यक्ति को समय रहते प्राथमिक उपचार प्रदान कर सकें। इस कार्यक्रम में वाहन चालक, मालिक और कंडक्टर सहित कई लोग शामिल हुए।
ट्रैफिक प्रभारी गजेंद्र केन ने बताया कि ‘इस शिविर का उद्देश्य केवल चालकों को नियमों की जानकारी देना नहीं है, बल्कि उन्हें दुर्घटना के समय जीवनरक्षक कदम उठाने में सक्षम बनाना भी है।’
देखिए तस्वीरें…






