Agri Tips: भारत हमेशा से ही कृषि प्रधान देश रहा है, लेकिन बीते 10-15 साल से अपनी खेती से बंपर उत्पादन लेने के चक्कर में किसान भाई रासायनिक उर्वरकों का बेतहाशा उपयोग कर रहे हैं. इसकी वजह से मिट्टी की उर्वरा शक्ति या यूं कहे कि उपजाऊ क्षमता धीरे-धीरे कम होती जा रही है. इसी के चलते खेती में लागत बढ़ती जा रही है, मुनाफा कम होता जा रहा है, अगर सब कुछ इसी तरह चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब खेती केवल लागत का साधन बनकर रह जाएगी.
इन्हीं सब कारणों को देखते हुए सरकार भी अलर्ट हुई है. किसानों को प्राकृतिक खेती करने को लेकर जागरूक कर रही है. इस तरह की खेती करने में उत्पादन भले ही थोड़ा कम मिलता है, लेकिन इसमें लागत बहुत कम होती है. डॉमेस्टिक मार्केट में जैविक और प्राकृतिक अनाज की बहुत डिमांड है, जिसकी वजह से सामान्य अनाज की तुलना में उनके भाव 2-3 गुना ज्यादा मिलते हैं, जिससे कम उपज की भरपाई आराम से हो जाती है.
17 से जैविक खेती के जानें फायदे
सागर के हीरापुर के किसान नरेंद्र असाटी 17 साल से जैविक खेती कर रहे हैं, जिसमें वह गेहूं, हल्दी, उड़द, मूंग के साथ सब्जियों को भी उगा रहे हैं, जिसमें उन्हें दो तरह के फायदे हो रहे हैं. एक तो उनकी लागत सीधे-सीधे कम हो गई, क्योंकि इसकी खेती करने के लिए वह घर के मवेशियों के गोबर की खाद का इस्तेमाल करते हैं. घर पर ही जीव अमृत, पंचगव्य, नीमस्त्र जैसे पोषक तत्व तैयार करते हैं, जिसमें फसल की बढ़वार के लिए, फूल फल के लिए वृद्धि के लिए या अन्य बीमारियों के लिए इनका उपयोग करते हैं, जिसमें किसी तरह की लागत नहीं आती.
कोरोना में सर्दी तक नहीं हुई…
नरेंद्र का कहना है कि जैविक खेती करने का हमारा अनुभव ये रहा कि इसमें बीमारी बहुत कम लगती है, अनाज बेहतरीन क्वालिटी का होता है जो लोग जागरूक हैं जानकार हैं वह आराम से अच्छे भाव देते हैं. नरेंद्र असाटी का कहना है कि हमारे घर में 10 सदस्य हैं और लंबे समय से घर पर उत्पादित होने वाली चीजों का ही हम लोग सेवन कर रहे हैं, जिससे बीमारियों का ज्यादा असर भी नहीं होता है. दावा किया कि कोरोना काल में भी हम लोगों को सर्दी तक नहीं हुई थी.
आराम से मिलेगा इतना मुनाफा
नरेंद्र का कहना है कि इसकी खेती की शुरुआत करते समय एक-दो साल में कम उपज का अंतर जरूर देखने को मिलता है, लेकिन धीरे-धीरे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है तो इसकी भरपाई होने लगती है. अगर लगन और पूरी मेहनत से योजना के तहत जैविक खेती की जाए तो रासायनिक खेती की तुलना में दोगुना मुनाफा बड़े आराम से कमाया जा सकता है. जिन किसानों के पास पानी के संसाधन काम हैं, वे भी 50 से 70 हजार तक का मुनाफा कमा सकते हैं. जैविक खेती से हमारी मिट्टी तो अच्छी रहती ही है, अन्न के इस्तेमाल से इम्यूनिटी अच्छी रहती है.