मसूर का सबसे बड़ा दुश्मन ये कीट, बचाव नहीं किया तो चौपट हो जाएगी फसल

मसूर का सबसे बड़ा दुश्मन ये कीट, बचाव नहीं किया तो चौपट हो जाएगी फसल


Last Updated:

Sidhi News: कृषि वैज्ञानिक डॉ वेद प्रकाश सिंह ने लोकल 18 से कहा कि ठंड में मसूर की फसल पर माहू कीड़े का प्रभाव बहुत कम रहता है लेकिन जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, इसका प्रकोप तेजी से फैलता है.

सीधी. मध्य प्रदेश के खेतों में इस समय मसूर की फसल लहलहा रही है. रबी सीजन की प्रमुख दलहनी फसलों में शामिल मसूर अब फूल और फलियों के बनने की अवस्था में पहुंच चुकी है. यह चरण फसल के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी समय दाने पढ़ने की प्रक्रिया शुरू होती है. ऐसे में किसानों को अपनी फसल का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. सीधी के कृषि वैज्ञानिक ने मसूर उत्पादक किसानों को महत्वपूर्ण सलाह दी है, जिनका पालन कर पैदावार और गुणवत्ता दोनों में बढ़ोतरी की जा सकती है.

कृषि वैज्ञानिक डॉ वेद प्रकाश सिंह ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि ठंड के मौसम में मसूर की फसल पर माहू कीड़ा का प्रभाव बहुत कम रहता है लेकिन जैसे-जैसे तापमान बढ़ता है, इसका प्रकोप तेजी से फैलने लगता है. खासतौर पर मैदानी क्षेत्रों में सरसों और मसूर की फसलें माहू के लिए अधिक खतरनाक होती हैं. माहू पौधों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है, जिससे फूल और फलियां झड़ने लगती हैं और उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है.

उर्वरकों का संतुलित उपयोग
उन्होंने आगे बताया कि यदि किसान समय रहते सही कदम उठाएं, तो माहू के नुकसान से आसानी से बचा जा सकता है. उन्होंने सलाह दी कि मसूर की फसल में पोटाश का प्रयोग और वॉटर सॉल्यूबल उर्वरकों का छिड़काव लाभकारी रहता है. इससे पौधों की ताकत बढ़ती है और दानों का भराव बेहतर होता है. इसके अलावा 00.50 और 52.34 जैसे उर्वरकों का संतुलित उपयोग करने से फसल की सेहत बनी रहती है और उत्पादन में सुधार होता है.

निमास्त्र का प्रयोग प्रभावी
विशेषज्ञों के अनुसार, जिन किसानों ने मसूर की जल्दी बुआई (अक्टूबर के मध्य) की है, उन्हें माहू के प्रकोप से ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं है. वहीं देर से बुआई करने वाले किसानों को विशेष सावधानी बरतनी होगी. यदि माहू का प्रकोप शुरुआती अवस्था में है और एक वर्ग मीटर क्षेत्र में कुछ ही पौधों तक सीमित है, तो जैविक कीट नियंत्रण जैसे निमास्त्र का प्रयोग प्रभावी साबित हो सकता है लेकिन यदि माहू का हमला अधिक फैल चुका हो, तो अनुशंसित सार्वांगिक कीटनाशकों का छिड़काव करना जरूरी हो जाता है.

संतुलित मात्रा में करें सिंचाई
कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को यह भी सलाह दी कि मसूर की फसल में सिंचाई संतुलित मात्रा में करें और आवश्यकता अनुसार ही निराई-गुड़ाई करें. रोग-प्रतिरोधी किस्मों का चयन, रोगग्रस्त पौधों को समय पर खेत से हटाना और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कवकनाशी का छिड़काव करने से फसल को सुरक्षित रखा जा सकता है‌. किसान सही सलाह अपनाकर मसूर की अच्छी उपज लेकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

homeagriculture

मसूर का सबसे बड़ा दुश्मन ये कीट, बचाव नहीं किया तो चौपट हो जाएगी फसल



Source link