संसद में ‘सरकारी झूठ’ की डिटेल मांग चुके 5 सांसद: टीचर ने पड़ोसी के छत की पाइप को बता दिया वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, फोटो भी खिंचवा ली – Khandwa News

संसद में ‘सरकारी झूठ’ की डिटेल मांग चुके 5 सांसद:  टीचर ने पड़ोसी के छत की पाइप को बता दिया वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, फोटो भी खिंचवा ली – Khandwa News


खंडवा के नारायण नगर की रहने वाली टीचर संध्या राजपूत को उच्च अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि आपको अपने घर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाना है। उनके घर से कुछ घर दूर एक मकान की छत से पाइप डली हुई थी। यह छत के पानी को नाली में पहुंचाने के लिए लगी है

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यह केस बयां कर रहा है, खंडवा जिले के जल संचयन, जन भागीदारी अभियान की हकीकत को। यहां हुए कामों की गूंज संसद में गूंजी तो स्थानीय स्तर पर भी हंगामा शुरू हो गया।

कांग्रेस पार्षद और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक (मुल्लू) राठौर का सवाल है कि जल संचयन, जन भागीदारी अभियान में खंडवा जिले ने जो आंकड़े पेश किए हैं, उस हिसाब से जिले में जल संरक्षण को लेकर सवा लाख से ज्यादा काम हुए हैं।

यह जिले में कुल निवासरत ढाई लाख परिवारों का आधा हिस्सा होता है। अगर वास्तव में जमीन पर काम हुआ है तो इस अभियान ने जन आंदोलन का रूप क्यों नहीं ले लिया। हकीकत यह है कि खंडवा का एक परिवार ऐसा नहीं है, जिसने इस अभियान में हिस्सा लिया हो।

राठौर का दावा है कि जल संचयन अभियान में जनभागीदारी तो दूर की बात, आपको जिले के जनप्रतिनिधि और सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के घरों तक में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं मिलेंगे। शहर के जो प्रबुद्ध लोग हैं, मैं तो कहूंगा, उन्हें तो इस अभियान के बारे में पता तक नहीं होगा। अब सरकारी आंकड़े तो आंकड़े होते हैं, अफसर तो इस खेल में माहिर हैं।

देश में नंबर वन आया जिला, राष्ट्रपति ने दिया पुरस्कार जल संचयन, जन भागीदारी अभियान पर सवाल तब उठे हैं, जब जिले ने देश में नंबर-1 का स्थान पाया। बतौर सम्मान स्वरूप राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कलेक्टर ऋषव गुप्ता और सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा को दो करोड़ रुपए की इनाम राशि भी दी है।

पुरस्कार मिलने के बाद पता चला कि जिले में पानी बचाने काे लेकर सवा लाख से ज्यादा काम किए गए हैं, तो यह बात किसी को हजम नहीं हुई। जल संचयन अभियान में खंडवा को देश में पहला स्थान मिलने के बाद जिले के नेता तो आश्चर्य में पड़े ही, इसकी गूंज देश के दूसरे राज्यों तक पहुंच गई।

खंडवा सांसद सहित दक्षिण भारत के राज्यों से जुड़े चार सांसदों ने संसद में सवाल लगा दिया। उन्होंने पूछा कि जल संचयन को लेकर क्या-क्या काम किए गए हैं, भूजल स्तर पर इसका कितना असर हुआ है, खासकर खंडवा जिले में…यह जानकारी दी जाए।

महाराष्ट्र के सांसदों ने संसद में मांग ली जानकारी महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर से बीजेपी सांसद भूमरे सांदीपन राव असाराम, महाराष्ट्र के लातूर से कांग्रेस सांसद कालगे शिवाजी बंडप्पा, दादरा और नगर हवेली से बीजेपी सांसद कालाबेन माेहनभाई डेलकर, खंडवा से बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और महाराष्ट्र के अहमदनगर से एनसीपी सांसद (शरद पंवार) नीलेश ज्ञानदेव लंके ने संयुक्त प्रश्न लगाते हुए जलशक्ति मंत्रालय से जानकारी मांगी थी।

जल संचयन अभियान के तहत 25 हजार की लागत से बनाए गए डगवैल रिचार्ज पीट में केवल आधा फीट गड्ढा खोदा गया।

जल संचयन अभियान के तहत 25 हजार की लागत से बनाए गए डगवैल रिचार्ज पीट में केवल आधा फीट गड्ढा खोदा गया।

सांसदों द्वारा 3 सवालों के जरिए मांगी गई जानकारी

  • महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और दादरा एवं नगर हवेली केंद्र शासित प्रदेश में जल संरक्षण प्रयासों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए जिलावार कार्यान्वित किए जा रहे उपाय और समय के साथ इन प्रयासों की प्रगति की निगरानी का तरीका?
  • उक्त राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में जल शक्ति अभियान के अंतर्गत जिलावार, विशेषकर खंडवा जिले में, जल संरक्षण पहलों का विवरण और इस पहल ने क्षेत्र में जलसंकट की चुनौतियों का किस हद तक समाधान किया है?
  • उक्त राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के विभिन्न जिलों, विशेषकर खंडवा जिले में, पिछले तीन वर्षों के दौरान जल शक्ति अभियान का प्रभाव, विशेषकर भूजल पुनर्भरण और वर्षा जल संचयन के संदर्भ में?

सवाल उठे तो खंडवा के अफसरों को सताया जांच का डर संसद में सवाल उठने के बाद खंडवा के अफसरों को जांच का डर सताने लग गया है। क्योंकि, जिस तरह अवॉर्ड की घोषणा होने और अवाॅर्ड मिलने के बाद प्रचार-प्रसार किया गया, कहीं किरकरी ना हो जाए, इसलिए अफसरों ने मैदान पकड़ लिया।

खुद कलेक्टर और सीईओ रोजाना स्कूल, कॉलेजों सहित नगर, ग्राम पंचायतों का दौरा कर रहे हैं। पानी को बचाने के लिए सेमिनार कर रहे हैं। यहां तक अवाॅर्ड मिलने के बाद पंचायत विभाग के इंजीनियरों को ट्रेनिंग दी गई।

बारिश के दो महीने बाद बोरी-बंधान करवा रहे कलेक्टर ऋषव गुप्ता और सीईओ जिला पंचायत डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा तो मैदान में उतरे ही, उन्हाेंने पंचायत स्तर पर सचिव और रोजगार सहायकों को भी काम पर लगवा दिया।

बारिश के सीजन को खत्म हुए ढ़ाई से तीन महीने हो गए हैं, अब जाकर नदी-नालों में बोरी-बंधान कराया जा रहा है, जबकि बोरी बंधान बारिश की विदाई के दौरान किया जाता है, ताकि बहते हुए पानी को रोक लिया जाए। अब जहां बोरी-बंधान हुआ है, वहां प्राकृतिक रूप से या फिर पूर्व में किए गए खनन के चलते पानी का जमाव हैं।

बारिश खत्म होने के तीन महीने बाद बोरी बंधान का कार्य किया जा रहा हैं।

बारिश खत्म होने के तीन महीने बाद बोरी बंधान का कार्य किया जा रहा हैं।

6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में मिला था पुरस्कार एक महीने पहले नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित 6वें राष्ट्रीय जल पुरस्कार समारोह में खंडवा जिले को बड़ी उपलब्धि मिली थी। जल संचयन जन भागीदारी अभियान में देश में प्रथम आने पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता और जिला पंचायत CEO डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा को सम्मानित किया था।

कलेक्टर गुप्ता ने बताया था कि भारत सरकार के ‘जल शक्ति अभियान: कैच द रेन’ के तहत शुरू की गई ‘जल संचय, जन भागीदारी’ पहल में खंडवा जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इसी के चलते जिले ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के लिए खंडवा जिले को 2 करोड़ रुपए का पुरस्कार मिला है।

कावेश्वर पंचायत को मिला था दूसरा पुरस्कार खंडवा जिले की ग्राम पंचायत कावेश्वर को जल संरक्षण के उल्लेखनीय कार्यों के कारण राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत की श्रेणी में द्वितीय पुरस्कार के लिए चुना गया था। इसके लिए पंचायत को 1.50 लाख रुपए का नकद पुरस्कार और ट्रॉफी प्रदान की गई थी।

जल संचयन अभियान को लेकर स्कूल-कॉलेज में जाकर सेमिनार कर रहे कलेक्टर ऋषव गुप्ता।

जल संचयन अभियान को लेकर स्कूल-कॉलेज में जाकर सेमिनार कर रहे कलेक्टर ऋषव गुप्ता।

कावेरी उद्गम कुंड का किया गया जीर्णोद्धार ग्राम पंचायत द्वारा पिछले सालों में कावेरी नदी के उद्गम कुंड का जीर्णोद्धार किया गया था। साथ ही पंचायत के पहाड़ी क्षेत्र को वाटरशेड के मूल सिद्धांत “रिज टू वैली” के आधार पर विकसित किया गया।

50 हेक्टेयर में किया जल संरक्षण का काम इसके तहत करीब 50 हेक्टेयर क्षेत्र में कंटूर, 55 गली प्लग, 35 पोखर तालाब, वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, हैंडपंप रिचार्ज, बोरवेल रिचार्ज और रिचार्ज शाफ्ट का निर्माण किया गया।

मजदूरी देकर मटेरियल का पैसा हड़प लिया छैगांवमाखन जनपद पंचायत के संगवाड़ा ग्राम निवासी शैलेंद्र पिता भावसिंह ने बताया कि, मई 2025 में डगवैल निर्माण के लिए 25-25 हजार रुपए स्वीकृत हुए थे। गांव में 14 किसानों को हितग्राही बनाया गया था। पंचायत के सचिव और रोजगार सहायक ने खेत के कुएं के पास जाकर एक फीट का गड्ढा खोदा और फोटो खींच लिया।

अब जिले में परिवारों की संख्या जान लीजिए जिला प्रशासन ने एक तरफ 1 लाख 29 हजार 46 कार्य करना बताया हैं। इसमें मकानों सहित सरकारी आवास, कार्यालय और खेत शामिल हैं। लेकिन इसके उलट जिले में कुल परिवारों की बात की जाए तो 2011 की जनगणना के अनुसार, दो लाख 66 हजार 655 हैं। वहीं वर्तमान में बिजली कंपनी की मानें तो जिले में उनके कुल घरेलू कनेक्शन 2 लाख 36 हजार 186 हैं।

सरकार का दावा है कि, 100% घरों में बिजली कनेक्शन हैं। ऐसे जल संचयन के आंकड़ों पर नजर डालें तो यह जिले के कुल परिवारों की संख्या से 50 फीसदी तक हैं। इस हिसाब से हर एक घर और परिवार को छोड़कर पानी बचाने काम होना चाहिए था, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं हैं।

पंचायतकर्मी बोलें- चार महीने का टारगेट मिला था नाम ना छापने की शर्त पर जमीन स्तर पर काम करने वाले कुछ पंचायत कर्मियों ने बताया कि, जिले की ओर से फरवरी 2025 में टारगेट मिला था कि आपको फोटो अपलोड कराना हैं। भीषण गर्मी के दौरान हम लोगों ने सिर्फ चार महीने फोटो अपलोड करने का ही काम किया हैं।

ज्यादातर कार्य तो आखिरी के एक महीने में ही किया हैं। काम के दबाव के चलते जल्दबाजी में पंचायतकर्मियों से गलतियां हुई हैं। जल गंगा संवर्धन और जल संचयन अभियान में कोई ज्यादा अंतर नहीं हैं। सीधा कान पकड़ो या उल्टा कान, बात तो एक ही हैं।

सीईओ बोले- अवार्ड पिछले साल का, फोटो बाद के जिला पंचायत सीईओ डॉ. नागार्जुन बी गौड़ा ने बताया कि शिक्षा विभाग के जो फोटो अपलोड हो रहे हैं, वो अक्टूबर 2025 के हैं। ये फर्जी हैं तो वेरिफिकेशन होगा। राष्ट्रीय स्तर पर जांच होती हैं। पिछले डेटा का भौतिक सत्यापन कराने के लिए भी दिल्ली से टीम आई थी। अभी जहां-जहां शिकायतें मिल रही हैं। वहां मौका-मुआयना करके संबंधित के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

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एमपी के खंडवा जिले को सबसे ज्यादा जल संरचनाओं के निर्माण और संरक्षण के उत्कृष्ट कामों के लिए जो पहला पुरस्कार मिला है, दरअसल वो इस साल का सबसे बड़ा सरकारी झूठ है। प्रशासन ने जिन तालाबों, डक वैल और स्टॉप डैम के निर्माण का दावा किया वो हकीकत में जमीन पर मौजूद ही नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…



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