थकान दूर, चेहरे पर नेचुरल ग्लो! आदिवासियों का भरोसेमंद ये जंगली काला फल

थकान दूर, चेहरे पर नेचुरल ग्लो! आदिवासियों का भरोसेमंद ये जंगली काला फल


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Adivasi jangli kala phal: हरे भरे पेड़ो वाले जंगल केवल घूमने या छाया के लिए नहीं होते हैं बल्कि इनमें कई इस तरह की फल होते हैं जो मानव जीवन में बड़े उपयोगी सिद्ध हो जाते हैं. कई बार डॉक्टर की दवाई असर नहीं करती और यह जंगली फल फूल पत्तियां प्रभाव देखा जाती है. ऐसे ही जंगल में बेल के रूप में फैलने वाले मकोय का पौधा भी होता है जिसे बुंदेलखंड में मकोय के नाम से जाना जाता है

खास करके आदिवासी क्षेत्र में इस तरह के पौधे बहुतआयत देखने को मिलते हैं क्योंकि उनके द्वारा इन्हें नष्ट नहीं किया जा रहा बल्कि संरक्षित कर बचाने के प्रयास कर रहे हैं और इनसे जो फल निकलते हैं. उनका देसी दवा में या अन्य चीजों में इस्तेमाल कर रहे हैं.

झाड़ियों पर

मकोरा का फल देखने में तो बहुत छोटा होता है लेकिन इसके औषधीय गुण बड़े कमाल के होते हैं अगर कोई व्यक्ति थोड़ा सा भी चलने पर थक जाता है या काम करने पर थकावट आ जाती है और वह मकोरा के फल को निश्चित मात्रा में नियमित सेवन करने लगता है तो धीरे-धीरे उसमें एनर्जी बढ़ने लगती है. यह एनर्जी को बढ़ाने और थकावट दूर करने के लिए जाना जाता है.

उपयोगी

आदिवासी बेल्ट में लोग इसके पत्तों को भी बड़ा उपयोगी मानते हैं अगर किसी के मुंह में छाले आ गए हैं तो दो से चार बार सुबह शाम इसके कुछ पेट अच्छे से चबा चबाकर थूंके तो इसमें आराम मिल जाता है डाली में कांटे होने की वजह से फल या पत्ते तोड़ते समय थोड़ी सावधानी रखनी पड़ती है.

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मकोड़ा

मकोय फल को लेकर माना जाता है कि नियमित सेवन से बाल काले होने लगते हैं स्किन चमकदार हो जाती है, पाचन तंत्र मजबूत होता है रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है लिवर को स्वस्थ रखता है इस तरह से यह कई चीजों में उपयोगी माना जाता है.

जंगल में मिलते

मकोरा केवल इंसानों के लिए नहीं बल्कि पक्षियों का भी काफी पसंदीदा होता है. साबूदाना के जैसा आकार, काले मोतियों के जैसा दिखाई देता है यह देखने में जितना खूबसूरत होता है. इसका खट्टा मीठा टेस्ट उतना ही लाजवाब होता है एक बार मुंह में इसका स्वाद लगने के बाद लोग किसी खाते ही जाते हैं. यह जितना पका और काले रंग का होता है उतना ही अच्छा लगता है.

साबूदाना वाला आकर

यह फल कच्चा हरे रंग का होता है कांटेदार डाली में एक साथ कई सारे फल लगे होते हैं लेकिन जब यह पककर काला हो जाता है तभी लोग इसको तोड़कर कहते हैं एनर्जी से भरपूर होने की वजह से इनको सुखाकर भी रख लेते हैं आदिवासी अंचलों में इनका अच्छे से ड्राई करने के बाद पाउडर बनाते हैं और फिर शहद के साथ भी कहते हैं.

सागर

सागर जिला मिश्रित वन क्षेत्र के लिए जाना जाता है यानी कि यहां पर सभी तरह की पेड़ पौधे और झाड़ियां होती हैं. इन्हीं पेड़ और झाड़ियो में कई तरह की जड़ी बूटी और औषधीय से भरपूर गुणों वाले भी पौधे शामिल होते हैं. आज भी उनके गुण जानने वाले इन्हें देखते ही पत्ते फूल फल टहनियां तोड़कर घर ले जाते हैं. पर संबंधित बीमारी वाले लोगों को देते हैं जिनसे उन्हें राहत मिलती है या आयुर्वेदिक इलाज मिल जाता है.

फल एनर्जी बढ़ने

सागर में लगने वाली बाजारों में भी आदिवासी और अन्य लोग इसको तोड़कर लाते हैं और बेचते हैं, लोग इन्हें खरीदते भी है और घर ले जाते हैं.

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