बैतूल में जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने पीपीपी मॉडल पर बन रहे मेडिकल कॉलेज का विरोध किया है। संगठन ने मंगलवार को मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जिले में पूर्ण रूप से शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की मांग की।
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जयस युवा प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष सोनू धुर्वे ने बताया कि बैतूल एक आदिवासी बहुल और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग का जिला है। उन्होंने आशंका जताई कि पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज बनने से शिक्षा और चिकित्सा दोनों महंगी हो जाएंगी। निजी संस्थाएं अपने लाभ के लिए नियम बनाएंगी, जिससे आम नागरिकों और छात्रों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
धुर्वे के अनुसार, शासकीय मेडिकल कॉलेज की वार्षिक फीस लगभग पचास हजार रुपए होती है, जबकि पीपीपी मॉडल कॉलेज में फीस को लेकर कोई स्पष्ट नियम या जानकारी उपलब्ध नहीं है। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के छात्र मेडिकल शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हो सकते हैं।
आरोप- बीजेपी नेताओं ने वादाखिलाफी की जयस ने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और विधायक हेमंत खंडेलवाल ने बैतूल में शासकीय मेडिकल कॉलेज बनाने की घोषणा की थी। संगठन का कहना है कि अब पीपीपी मॉडल लागू करके जनता से किया गया वादा तोड़ा जा रहा है।
संगठन ने पीपीपी मॉडल में आरक्षण नीति (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग) के पालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट न होने पर चिंता व्यक्त की।
ज्ञापन के माध्यम से मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि बैतूल में प्रस्तावित पीपीपी मॉडल मेडिकल कॉलेज को पूर्णतः शासकीय मेडिकल कॉलेज के रूप में स्थापित किया जाए। इससे आदिवासी और गरीब वर्ग के छात्रों को सुलभ चिकित्सा शिक्षा प्राप्त हो सकेगी।
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 23 दिसंबर को बैतूल में इस मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया था। यह कॉलेज पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर बनाया जा रहा है, जिसके लिए राज्य सरकार RKDF ग्रुप के साथ अनुबंध करने की तैयारी में है।

