रीवा की मनगवां विधानसभा इन दिनों किसी सड़क या पुल को लेकर नहीं, बल्कि विधायक प्रतिनिधियों की रिकॉर्ड फेहरिस्त को लेकर सुर्खियों में है। भाजपा विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति अब प्रदेश के सबसे ज्यादा विधायक प्रतिनिधियों वाले विधायक बन चुके हैं। यह सू
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लिस्ट में पूरे 36 विधायक प्रतिनिधियों के नाम हैं। हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंत्रिपरिषद में कुल 31 मंत्री हैं,जिनमें 18 कैबिनेट मंत्री,6 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 4 अन्य राज्यमंत्री शामिल हैं। जबकि मनगवां के विधायक उनसे भी आगे निकल गए हैं।
विधायक के ऑफिस से जारी हुआ आदेश विधायक कार्यालय से जारी आदेश के मुताबिक, इन प्रतिनिधियों की नियुक्ति राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, विद्युत, पंचायत, नगर परिषद, PWD, RES, महिला एवं बाल विकास, ITI, स्कूल-कॉलेज, गौशालाओं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक की गई है।
लगभग हर विभाग के लिए अलग विधायक प्रतिनिधि तय किए गए हैं। इस पूरे मामले पर विधायक नरेंद्र प्रजापति की ओर से कहा गया है कि“विधानसभा क्षेत्र बड़ा है, समस्याएं भी व्यापक हैं। हर विभाग में प्रतिनिधि होने से जनता की शिकायतों का समाधान तेजी से हो सकेगा और कामकाज पर सीधी निगरानी रहेगी।
वहीं इस मुद्दे पर विपक्ष ने तंज कसा है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा ने चुटकी लेते हुए कहा कि
“गौशाला में गाय चारा खा रही हो या नहीं—प्रतिनिधि मौजूद हैं। “प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर समय पर आ रहे हों या नहीं—देखने वाला प्रतिनिधि है। “स्कूल-कॉलेज, पंचायत, नगर परिषद, बिजली, PWD, RES—सब जगह विधायक प्रतिनिधि तैनात हैं।
विनोद शर्मा ने आगे कहा कि“अगर किसी विधानसभा में 36 विधायक प्रतिनिधि हों, तो उसे विधानसभा नहीं बल्कि मिनी कैबिनेट कहना ज्यादा ठीक होगा। अब देखना यह है कि प्रतिनिधियों की संख्या जितनी बड़ी है, काम की रफ्तार भी उतनी ही तेज होती है या नहीं।”
फिलहाल मनगवां विधानसभा में विधायक प्रतिनिधियों की यह लंबी सूची सियासी चर्चाओं का केंद्र बनी हुई है। कोई इसे मजबूत प्रशासनिक मॉडल बता रहा है, तो कोई इसे लेकर चटखारे ले रहा है। लेकिन एक बात तय है—मनगवां ने विधायक प्रतिनिधियों के मामले में प्रदेश की राजनीति में नया रिकॉर्ड जरूर दर्ज करा दिया है।
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