देश के सबसे स्वच्छ शहर में यह कैसा कहर? इंदौर में पानी पीने से बिछ गईं 8 लाशें, 1 हजार से अधिक बीमार

देश के सबसे स्वच्छ शहर में यह कैसा कहर? इंदौर में पानी पीने से बिछ गईं 8 लाशें, 1 हजार से अधिक बीमार


रिपोर्ट-मिथिलेश गुप्ता, इंदौर

Indore water contamination News: देश में स्वच्छता का मॉडल कहे जाने वाले इंदौर में जो हुआ, उसने न सिर्फ प्रशासन बल्कि आम लोगों के भरोसे को भी हिला कर रख दिया है. नर्मदा से आने वाला शुद्ध पानी, जिस पर पूरा शहर निर्भर करता है, वही पानी मौत और बीमारी की वजह बन गया. बीते कुछ दिनों में इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में हालात इतने बिगड़ गए कि एक के बाद एक लोगों की तबीयत खराब होने लगी और देखते ही देखते यह मामला भयावह त्रासदी में बदल गया. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है.

शुरुआत में लगा सामान्य पेट दर्द की है समस्या
शुरुआत में लोगों को लगा कि यह सामान्य पेट दर्द या मौसमी बीमारी है, लेकिन जब एक ही इलाके से लगातार उल्टी, दस्त और तेज बुखार के मरीज अस्पताल पहुंचने लगे, तब डॉक्टरों और प्रशासन को भी खतरे का अंदाजा हुआ. हालात यह रहे कि अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 1000 से अधिक लोग बीमार बताए जा रहे हैं. कई मरीजों की हालत गंभीर बनी हुई है और अस्पतालों में भर्ती का सिलसिला अभी भी जारी है.

बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित
इस पूरे संकट का केंद्र भागीरथपुरा इलाका बना, जहां की आबादी घनी है और लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए सीधे नल के पानी पर निर्भर रहते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि जैसे ही उन्होंने नर्मदा का पानी पिया, कुछ ही घंटों में पेट दर्द शुरू हो गया, फिर उल्टी-दस्त और कमजोरी ने जकड़ लिया. बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए.

पुलिस चॉकी के टॉयलेट के नीचे मिली पाइपलाइन
नगर निगम ने जब मामले की गंभीरता को समझते हुए जांच शुरू की, तो जो सच सामने आया उसने सभी को सन्न कर दिया. जांच में पाया गया कि भागीरथपुरा पुलिस चौकी के टॉयलेट के ठीक नीचे नर्मदा की मुख्य जल पाइपलाइन में लीकेज था. इस लीकेज के कारण सीवेज और गंदा पानी सीधे पीने के पानी की लाइन में मिल रहा था. यानी लोग अनजाने में सीवेज मिला पानी पी रहे थे.

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर खड़े हुए गंभीर सवाल
इस खुलासे के बाद नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए. इतनी महत्वपूर्ण पाइपलाइन के नीचे शौचालय का निर्माण कैसे हुआ, इसकी नियमित जांच क्यों नहीं की गई और लीकेज समय रहते क्यों नहीं पकड़ा गया इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं. लोगों का गुस्सा अब सिर्फ बीमारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सिस्टम की लापरवाही पर भी है.

डॉक्टरों ने क्या कहा?
अस्पतालों में हालात बेहद तनावपूर्ण हैं. सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों की भीड़ लगी है, ORS और जरूरी दवाओं की खपत अचानक कई गुना बढ़ गई है. डॉक्टरों का कहना है कि यह पूरी तरह जलजनित बीमारी का मामला है और समय पर इलाज न मिलने पर हालात और बिगड़ सकते थे. स्थिति को काबू में करने के लिए प्रभावित इलाकों की जल सप्लाई बंद कर दी गई है और टैंकरों से साफ पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं, लोगों को दवाएं दी जा रही हैं और गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है. बावजूद इसके, इलाके में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

देश के सबसे स्वच्छ शहर में कोहराम
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इंदौर को बार-बार देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया जाता है, तो क्या स्वच्छता सिर्फ सड़कें साफ रखने और रैंकिंग तक ही सीमित है? अगर पीने का पानी ही सुरक्षित नहीं है, तो ऐसे तमगों का क्या मतलब? भागीरथपुरा की यह घटना सिर्फ एक वार्ड की कहानी नहीं है, बल्कि यह पूरे शहरी सिस्टम के लिए चेतावनी है. अगर बुनियादी सुविधाओं की निगरानी और जवाबदेही तय नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं किसी भी शहर में दोहराई जा सकती हैं.

3 अधिकारी निलंबित
घटना सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में जरूर आया, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है. नगर निगम के कौन-कौन से अधिकारी इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार हैं, यह अब तक साफ नहीं हो पाया है. पानी की मुख्य लाइन में लीकेज लंबे समय से था या हाल ही में हुआ इसकी भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है. अगर यह लीकेज पहले से मौजूद था, तो नियमित निरीक्षण और मॉनिटरिंग सिस्टम पूरी तरह फेल साबित होता है. लोगों की मांग है कि सिर्फ मरम्मत नहीं, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो. भागीरथपुरा में मामले में 3 अधिकारियों को किया निलंबित और जांच समिति भी गठित की गई है.

शहर की पूरी जल व्यवस्था पर उठे सवाल
भागीरथपुरा की इस घटना ने इंदौर की पूरी जल आपूर्ति व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है. सवाल यह है कि क्या अन्य इलाकों में भी ऐसी ही कमजोर पाइपलाइन और सीवेज के नजदीक जल सप्लाई लाइनें मौजूद हैं? क्या उनकी नियमित जांच होती है या नहीं? लोगों में डर है कि कहीं यह समस्या सिर्फ एक वार्ड तक सीमित न हो. विशेषज्ञों का कहना है कि अब पूरे शहर की नर्मदा जल सप्लाई लाइन का ऑडिट और स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी हो गया है, वरना अगला हादसा कहीं और भी हो सकता है.



Source link