Damien Martyn Health Update: साल 2025 के आखिरी दिन क्रिकेट फैंस के लिए दिल तोड़ने वाली खबर आई है. ऑस्ट्रेलिया के पूर्व स्टार बल्लेबाज डेमियन मार्टिन की हालत बेहद खराब है और वो इस समय जिंदगी और मौत से जंग लड़ रहे हैं. 54 वर्षीय मार्टिन को बॉक्सिंग डे (26 दिसंबर) पर अचानक तबीयत खराब होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था और बताया जा रहा है कि मेनिन्जाइटिस के कारण उन्हें कोमा में रखा गया है. इस बीमारी में मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी के आसपास की झिल्लियों में सूजन आ जाती है.
डेमियन मार्टिन ने 2003 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया था. भारत के खिलाफ हुए फाइनल में भी उन्होंने 88 रनों की कीमती पारी खेली थी. मार्टिन ने तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पोंटिंग के साथ मिलकर 234 रनों की अद्भुत पार्टनरशिप कर टीम इंडिया को पूरी तरह से बैकफुट पर धकेल दिया था. ऑस्ट्रेलिया का ‘वर्ल्ड कप हीरो’ इस समय कोमा में है और पूरा क्रिकेट जगत उनकी सलामती के लिए दुआ मांग रहा है.
किस बीमारी से लड़ रहे हैं डेमियन मार्टिन?
वीवीएस लक्ष्मण और रविचंद्रन अश्विन जैसे भारतीय दिग्गजों से लेकर इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन तक, सभी ने सोशल मीडिया पर मार्टिन और उनके परिवार के प्रति समर्थन व्यक्त किया है. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मार्टिन को डॉक्टरों ने मेनिन्जाइटिस (Meningitis) से पीड़ित पाया है. संक्रमण और मस्तिष्क की सूजन को कम करने के लिए उन्हें ‘इंड्यूस्ड कोमा’ में रखा गया है.
क्या है मेनिन्जाइटिस?
मेनिन्जाइटिस (Meningitis) एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति है जिससे ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर डैमियन मार्टिन इस समय जूझ रहे हैं. आसान भाषा में कहें तो यह हमारे मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारी है. हमारे दिमाग और रीढ़ की हड्डी के चारों ओर एक सुरक्षात्मक झिल्ली होती है, जिसे ‘मेनिन्जेस’ (Meninges) कहा जाता है. जब इस झिल्ली में संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है, तो उसे ‘मेनिन्जाइटिस’ कहते हैं. इसे आम भाषा में ‘दिमागी बुखार’ भी कहा जाता है.
डेमियन मार्टिन का क्रिकेट करियर
शानदार ‘कवर ड्राइव’ और ‘कट शॉट’ खेलने में माहिर डेमियन मार्टिन ने 1992 में इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखा था. महान बल्लेबाज रिकी पोंटिंग और मैथ्यू हेडन के कारण मार्टिन को वो पहचान नहीं मिली, जिसके वो हकदार थे. हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के लिए शानदार प्रदर्शन किया. दाएं हाथ के स्टाइलिश बल्लेबाज ने 1992 से 2006 तक 67 टेस्ट मैच खेले, जिनमें उन्होंने 46.37 के औसत से 4,406 रन बनाए और 13 शतक जड़े. उनका उच्चतम टेस्ट स्कोर 2005 में न्यूजीलैंड के खिलाफ बनाया गया शानदार 165 रन था. उन्होंने 2006-07 एशेज सीरीज के दौरान संन्यास ले लिया और बाद में कमेंटेटर बन गए.
टूटी उंगली के साथ जड़ा था शतक
उन्होंने 208 एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में 40.80 की औसत से 5,346 रन बनाए. वे ऑस्ट्रेलिया की उन दिग्गज टीमों के अहम सदस्य थे जिन्होंने 1999 और 2003 में विश्व कप जीता था। 2003 विश्व कप के फाइनल में भारत के खिलाफ उन्होंने टूटी उंगली के बावजूद 88 रन की महत्वपूर्ण नाबाद पारी खेली थी. उनके करियर में 2006 में चैंपियंस ट्रॉफी जीतना भी शामिल है.
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