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IAS Nagarjuna B Goda: मध्य प्रदेश के सबसे फेमस सोशल मीडिया पर हमेशा छाए रहने वाले युवा IAS नागार्जुन बी गोड़ा फिर एक नई मुश्किल में फंस गए हैं. यह कहानी कर्नाटक के सूखा प्रभावित गांव से शुरू होकर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले तक पहुंचती है, जहां जल संरक्षण अभियान ने नेशनल वाटर अवॉर्ड दिलाया MBBS से UPSC तक का सफर और अब कैच द रैन पोर्टल से जुड़े AI से बनी तस्वीरों के बीच फंस गए हैं.
मध्य प्रदेश के सबसे फेमस सोशल मीडिया पर हमेशा छाए रहने वाले युवा IAS नागार्जुन बी गोड़ा फिर एक नई मुश्किल में फंस गए हैं.

सूखे गांव में जन्म, प्रशासन में पहचान और अब जल अवॉड विवाद,फेमस IAS नागार्जुन बी गोड़ा की पूरी कहानी क्या है?

यह कहानी कर्नाटक के सूखा प्रभावित गांव से शुरू होकर मध्य प्रदेश के खंडवा जिले तक पहुंचती है, जहां जल संरक्षण अभियान ने नेशनल वाटर अवॉर्ड दिलाया MBBS से UPSC तक का सफर और अब कैच द रैन पोर्टल से जुड़े AI से बनी तस्वीरों के बीच फंसी है
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राष्ट्रीय जल पुरस्कार मिलने के बाद मध्यप्रदेश के खंडवा जिले का नाम देशभर में गूंजा, तो इसके पीछे केवल एक प्रशासनिक योजना नहीं, बल्कि एक अफसर का निजी संघर्ष और बचपन का अनुभव भी जुड़ा था. यह अफसर हैं खंडवा जिला पंचायत सीईओ IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा है

आईएएस नागार्जुन गौड़ा का जन्म व माता-पिता दरअसल, कर्नाटक के तुमकुरु जिले का तिप्तूर एक ऐसा इलाका है, जहां बूंद-बूंद पानी हमेशा से संघर्ष का विषय रहा है. यहीं के एक छोटे गांव में IAS डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा का जन्म 5 मई 1992 को बेट्टे गौड़ा और प्रभा गौड़ा के घर में हुआ.

नागार्जुन के माता-पिता दोनों शिक्षक हैं. नागार्जुन गौड़ा ने अपने गांव में पानी की किल्लत को सिर्फ देखा नहीं, बल्कि जिया भी. शायद यही वजह है कि सालों बाद जब वे IAS बने, तो जल संरक्षण उनके लिए केवल एक प्रशासनिक लक्ष्य नहीं, बल्कि व्यक्तिगत मिशन बन गया था.

खंडवा को 2 करोड़ का राष्ट्रीय जल पुरस्कार केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के वर्षा जल संचयन कार्यक्रम के तहत देश में ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला जिला’ घोषित किया गया, जिसके लिए 2 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार मिला. 18 नवंबर 2025 को दिल्ली के विज्ञान भवन में राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्राप्त करने के बाद IAS नागार्जुन गौड़ा ने कहा था कि “जब जल संचय, जन भागीदारी योजना शुरू हुई, तो यह मेरे लिए व्यक्तिगत हो गया.”

IAS नागार्जुन गौड़ा कहते हैं कि वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. पड़ोसियों को पानी के लिए संघर्ष करते हुए देखकर बड़े हुए. उन्हें खुद को बोरवेल से कुछ बाल्टी पानी भरने के लिए लंबी दूरी तक साइकिल से चलकर जाना पड़ता था.

नागार्जुन गौड़ा कहते हैं कि कभी-कभी मैं उस बोरवेल के लीवर को 10 मिनट तक खींचता था, तब जाकर एक-दो बाल्टी पानी मिल पाता था. तुमकुरु के ठीक उत्तर में चित्रदुर्ग है, जो कर्नाटक के सबसे सूखे इलाकों में से एक है और दशकों से सूखे की मार झेल रहा है.

नागार्जुन गौड़ा ने पढ़ाई के दम पर MBBS की डिग्री हासिल की और डॉक्टर बने. लेकिन इलाज के कमरे में बैठकर उन्होंने महसूस किया कि व्यवस्था की बीमारियों का इलाज सिस्टम के भीतर से ही संभव है. यही सोच उन्हें UPSC तक ले गई AI तस्वीरों पर उठा विवाद, प्रशासन की सफाई इस मामले पर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा और खंडवा जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि JSJB पोर्टल और ‘कैच द रेन’ (CTR) पोर्टल अलग-अलग हैं.