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सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया की बर्खास्तगी रद्द की, ईमानदार न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा पर जोर दिया और हाईकोर्ट के आदेश को भी निरस्त किया.
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के उस न्यायिक अधिकारी की बर्खास्तगी को सोमवार को रद्द कर दिया जिस पर आबकारी अधिनियम के तहत आरोपियों को जमानत देने में अलग-अलग मापदंड अपनाने और भ्रष्टाचार में लिप्त होने का आरोप था. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि न्यायिक अधिकारी को 27 वर्ष तक न्यायपालिका में ‘बेदाग’ सेवा रिकॉर्ड के साथ काम करने के बावजूद समुचित प्रक्रिया का पालन किए बिना सेवा से हटाया गया.
पीठ ने अधीनस्थ न्यायपालिका के न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ पीड़ित पक्षों के कहने पर तुच्छ आरोप लगाए जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता जताई और ऐसे अधिकारियों की सुरक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि इसी कारण अधीनस्थ न्यायपालिका के अधिकारी जमानत देने से हिचकते हैं और हाई कोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट पर जमानत याचिकाओं का बोझ बढ़ जाता है.
उसने साथ ही कहा कि भ्रष्ट आचरण में लिप्त न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई सहित कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए. पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि बार के सदस्य भी न्यायपालिका के सदस्यों के खिलाफ तुच्छ आरोप लगाने में लिप्त रहते हैं और उसने उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी.
पीठ की ओर से फैसला लिखने वाले जस्टिस विश्वनाथन ने कहा कि हाईकोर्ट को केवल परस्पर विरोधी न्यायिक आदेशों के कारण न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करते समय सावधानी बरतनी चाहिए. जस्टिस पारदीवाला ने निर्णय से सहमति जताते हुए न्यायमूर्ति विश्वनाथन द्वारा लिखे फैसले की सराहना की और कहा कि यह ‘बहुत साहसिक फैसला’ है, जो ईमानदार न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में काफी मदद करेगा. शीर्ष अदालत ने मध्यप्रदेश के न्यायिक अधिकारी निर्भय सिंह सुलिया को उनकी सेवानिवृत्ति तक पूर्ण मौद्रिक लाभ देने का निर्देश दिया और सितंबर, 2015 के बर्खास्तगी के आदेश तथा उनकी सेवा समाप्ति को बरकरार रखने संबंधी हाईकोर्ट के आदेश को भी रद्द कर दिया.
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न्यूज18 हिंदी में बतौर एसोसिएट एडिटर कार्यरत. मीडिया में करीब दो दशक का अनुभव. दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, आईएएनएस, बीबीसी, अमर उजाला, जी समूह सहित कई अन्य संस्थानों में कार्य करने का मौका मिला. माखनलाल यूनिवर्स…और पढ़ें