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MP Government Scheme: मध्य प्रदेश में खरगोन जिले के महेश्वर में पत्नी के सहयोग और सरकारी योजना से एक प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन का सपना पूरा हुआ. इशिका को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना से मिले 8 लाख के ऋण से उसने अपने पति के लिए पैथोलॉजी लैब की शुरुआत की और आज यह लैब न सिर्फ परिवार की आजीविका का साधन है, बल्कि क्षेत्र में भरोसेमंद जांच सेवाएं भी दे रही है.
यह कहानी खरगोन जिले के महेश्वर के वार्ड-1 पेश्वा मार्ग की रहने वाली इशिका सोनी और उनके पति की है. इशिका के पति एक प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन हैं, जो वर्षों से अलग-अलग जगहों पर काम करते हुए अपना खुद का पैथोलॉजी लैब खोलने का सपना देख रहे थे. तकनीकी अनुभव और मेहनत तो थी, लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी उनके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई थी.

पति के इस सपने को साकार करने में इशिका सोनी ने मजबूत सहारा दिया. इशिका खुद भी चाहती थीं कि परिवार स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में कुछ सार्थक काम करे, जिससे समाज को लाभ मिले. पति के अनुभव और अपनी सोच को मिलाकर उन्होंने खुद का पैथोलॉजी लैब शुरू करने का मन बनाया.

इसी दौरान इशिका को मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना की जानकारी भारतीय स्टेट बैंक के मैनेजर के माध्यम से मिली. इसके बाद उन्होंने उद्योग विभाग के अधिकारियों से योजना की पूरी जानकारी ली. नियम, शर्तें और प्रक्रिया समझने के बाद इशिका ने योजना के तहत आवेदन करने का फैसला किया.
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योजना के अंतर्गत इशिका को पैथोलॉजी लैब शुरू करने के लिए ऋण की सुविधा मिली. इस राशि से लैब के लिए जरूरी मशीनें, जांच उपकरण और अन्य संसाधन खरीदे गए. पति के तकनीकी ज्ञान और इशिका के प्रबंधन सहयोग से कुछ ही समय में लैब शुरू हो गई.

सांवरिया पैथोलॉजी लैब के शुरू होते ही स्थानीय लोगों को इसका लाभ मिलने लगा. समय पर जांच, सही रिपोर्ट और भरोसेमंद सेवाओं की वजह से महेश्वर क्षेत्र में लैब की पहचान तेजी से बनी. आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी लोग जांच के लिए आने लगे.

आज सांवरिया पैथोलॉजी लैब महेश्वर क्षेत्र में एक भरोसेमंद नाम बन चुकी है. इशिका सोनी आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं और उनके पति का वर्षों पुराना सपना भी पूरा हुआ है. दोनों मिलकर क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं.

गौरतलब है कि इशिका सोनी को वर्ष 2024-25 में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के तहत 8 लाख रुपये का ऋण मिला. योजना के तहत वितरित ऋण पर 3 प्रतिशत ब्याज अनुदान और सीजीटीएमएसई गारंटी फीस अधिकतम 7 साल तक शासन द्वारा वहन की जाती है. इसी सहयोग ने इशिका और उनके पति को अपने सपने को हकीकत में बदलने का मौका दिया.