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Bundelkhand Weather Update: मौसम विभाग ने सागर समेत छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और दमोह के लिए अलर्ट जारी किया है. जनवरी में कोहरा, शीतलहर से जूझना पड़ेगा. वहीं किसानों को पाले से फसल बचानी होगी. बच्चे-बूढ़ों को भी सेहत के प्रति सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी कर दी गई है. जानें सब…
Sagar Weather Update: बुंदेलखंड में साल बदलते ही मौसम का मिजाज भी बदल गया है. अब जबरदस्त कोहरा देखने को मिल रहा है. साथ ही शीतलहर ने लोगों को घरों में कैद कर दिया है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि जनवरी का महीना ऐसे ही उतार-चढ़ाव भरा रहेगा. पहले सप्ताह जहां कोहरे के नाम रहेगा तो वहीं दूसरे सप्ताह में तापमान गिरने से कड़ाके की ठंड पड़ सकती है. यह सिलसिला आगे भी बना रहेगा. मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, जनवरी में 12 से 18 दिन शीतलहर चल सकती है.
सागर मौसम कार्यालय के विज्ञानी विवेक छलोत्रे बताते हैं कि जनवरी महीने का जलवायु लक्षण सामान्यतः दिसंबर महीने के समान ही होता है. आसमान साफ और बादल रहित होता है. ओलावृष्टि के साथ गरज-चमक का मौसम भी बन सकता है. जनवरी में कुछ दिन तक शीतलहर चलना सामान्य है. इस दौरान न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.5-6.4 डिग्री कम रह सकता है. पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने के बाद अति शीतलहर चल सकती है. इस कारण न्यूनतम तापमान 6 डिग्री तक गिर सकता है. बारिश के तुरंत बाद कोहरे की स्थिति भी हो सकती है, जिसकी वजह से दृश्यता लगभग शून्य हो जाती है.
मौसम विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, सागर में सबसे ज्यादा कड़ाके की ठंड 92 साल पहले पड़ी थी. 13 जनवरी 1934 को न्यूनतम तापमान 1.7 डिग्री दर्ज किया गया था. 24 घंटे में सर्वाधिक 84.1 मिमी बारिश 13 जनवरी 1887 को और सर्वाधिक कुल मासिक वर्षा 180.6 मिमी 1948 में दर्ज की गई थी. इस माह की औसत वर्षा 13 मिमी है. वहीं पिछले 10 साल की बात करें तो 2018, 2019 ओर 2025 को छोड़कर बाकी सालों में जनवरी में बारिश हुई.
शीतलहर से बचाव की एडवाइजरी
स्वास्थ्य विभाग के द्वारा शीतलहर से बचाव करने के लिए एडवाइजरी जारी की गई है, जिसमें कहा गया कि बच्चे और बुजुर्ग की अच्छे से देखभाल करें और उन्हें घर के बाहर न जाने दे, युवाओं को भी इससे बचाव करना चाहिए दो पहिया वाहन चलाने से बच्चे अगर जाना जरूरी है तो खुद को अच्छे से गर्म कपड़ों से कवर करें. गुनगुना पानी पीते रहें, बाहर का खाने से बचें.
फसलों के लिए पाला से बचाने के उपाय
इंसानों के साथ मौसम का सबसे अधिक प्रभाव फसलों पर देखने को मिलेगा. तापमान गिरने से चना, मसूर, मटर, सरसों और सब्जियों की फसलों पर पाला लगने का खतरा रहता है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, फसलों को पाला से बचाने के लिए किसान खेतों में स्प्रिंकलर से शाम के समय सिंचाई कर दें. इसके अलावा खेत की मेड़ पर चार को भिगोकर धुंआ कर दें. थायो यूरिया का छिड़काव भी कर सकते हैं.
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एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें