बांग्लादेश में पिछले 10 साल में खेले सिर्फ 6 हिंदू क्रिकेटर, एक-एक नाम जान लें

बांग्लादेश में पिछले 10 साल में खेले सिर्फ 6 हिंदू क्रिकेटर, एक-एक नाम जान लें


नई दिल्ली: 1971 में पाकिस्तान से अलग होने के 15 साल बाद बांग्लादेश को इंटरनेशनल क्रिकेट का दर्जा मिला. टीम ने 1986 में पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला वनडे मैच खेला और तभी से बंगाल के हिंदू क्रिकेटर्स के साथ भेदभाव शुरू हो गया. बांग्लादेश के लिए पहली बार किसी हिंदू क्रिकेटर को साल 2000 में मौका मिल सका. बांग्लादेशी टीम को टेस्ट स्टेटस साल 2000 में मिला और भारत के खिलाफ पहले टेस्ट में रंजन दास नाम के क्रिकेटर को खिलाया गया.

रंजन दास ने इसके बाद अपना धर्म बदला और इस्लाम कबूल किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अगला मौका नहीं मिला. चलिए आपको बांग्लादेश से खेल चुके हिंदू क्रिकेटर्स से मिलवाते हैं.

लिटन दास
बंगाली-हिंदू लिटन दास लंबे समय से बांग्लादेश टीम के लिए खेल रहे हैं. तीनों प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके लिटन को भारत की मेजबानी में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश का कप्तान बनाया गया है. 50 से ज्यादा टेस्ट, 90 से ज्यादा वनडे और 100 से ज्यादा टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच शामिल हैं, उन्होंने 2019 में देबाश्री बिस्वास सोनचिता से शादी की.

टी-20 वर्ल्ड कप के लिए कप्तान बनाए गए लिटन दास

सौम्य सरकार
एक अन्य बंगाली-हिंदू क्रिकेटर सौम्य सरकार, जिन्होंने बांग्लादेश के लिए हर फॉर्मेट में दम दिखाया. सौम्य सरकार ने कई मौकों पर टीम को जीत भी दिलाई. 87 टी-20, 79 वनडे और 16 टेस्ट खेल चुके सौम्य अब भी बांग्लादेशी टीम के अहम सदस्य हैं.

आलोक कपाली

आलोक कपाली
एक हिंदू परिवार में पैदा हुए आलोक कपाली बांग्लादेश के शुरुआती क्रिकेटरों में से थे, उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के दौरान बड़ी संख्या में टेस्ट और वनडे के साथ-साथ कुछ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच भी खेले. टेस्ट क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले पहले बांग्लादेशी क्रिकेटर बने आलोक कपाली एक वर्ल्ड क्लास ऑलराउंडर थे. आलोक कपाली ने अपना एकमात्र वनडे शतक भारत के खिलाफ ही जड़ा था, इसके बाद वह भारत की बागी क्रिकेट लीग ICL (इंडियन क्रिकेट लीग) से जुड़ गए, जिस वजह से बांग्‍लादेश क्रिकेट बोर्ड ने उन पर बैन भी लगाया. अप्रैल 2011 में उनकी अपनी नेशनल टीम में वापसी तो हुई लेकिन चंद महीने बाद ही उनका इंटरनेशनल करियर खत्म हो गया.

तपश बैसिया
तपश बैसिया ने टेस्ट और वनडे दोनों में बांग्लादेश का प्रतिनिधित्व किया. हालांकि उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपने धार्मिक विश्वासों के बारे में बात नहीं की है, लेकिन उनकी पृष्ठभूमि को अक्सर हिंदू समुदाय से जोड़ा जाता रहा है. वह अपनी टीम के प्रीमियम तेज गेंदबाज थे.

तपस बैसिया

धीमान घोष
विकेटकीपर-बल्लेबाज धीमान घोष ने बांग्लादेश के लिए कुछ वनडे मुकाबले खेले.  खेला है, जिसमें उन्होंने कई वनडे और एक टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच शामिल हैं. मगर 14 वनडे और एक टी-20 मैच के बाद इस विकेटकीपर बैटर का सफर खत्म हो गया.

रोनी तालुकदार
नारायणगंज में एक हिंदू परिवार में पैदा हुए रोनी तालुकदार ने बांग्लादेश के लिए सफेद गेंद क्रिकेट में एक वनडे और कई टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं. 2023 में उन्होंने अपना पहला वनडे मैच खेला जबकि सात साल पहले यानी 2015 में टी-20 इंटरनेशनल डेब्यू कर चुके थे. वह लंबे समय तक टीम में अपनी बारी का इंतजार करते रहे, लेकिन घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बावजूद कभी तमीम इकबाल को चुना गया तो कभी किसी दूसरे प्लेयर पर भरोसा जताया गया. 2023 में बांग्लादेश के लिए आखिरी मैच खेलने वाले रॉनी अब भी प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक्टिव हैं.



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