सतना में मकर संक्रांति मतलब तिल के लड्डू, खुशबू से महक उठती परंपरा

सतना में मकर संक्रांति मतलब तिल के लड्डू, खुशबू से महक उठती परंपरा


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Makar Sankranti Til Laddu Recipe: मकर संक्रांति से एक-दो दिन पहले घरों में तिल के लड्डू बनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं. लड्डू बनाने के लिए 250 ग्राम सफेद तिल, 250 ग्राम गुड़, दो बड़े चम्मच देसी घी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और स्वाद बढ़ाने के लिए कटे हुए काजू, बादाम या फिर पिस्ता का उपयोग किया जाता है.

सतना. मकर संक्रांति का पर्व जैसे-जैसे नजदीक आता है, वैसे-वैसे बघेलखंड के गांवों और शहरों में उत्साह और परंपराओं की रौनक बढ़ने लगती है. इस पर्व की सबसे खास पहचान हैं तिल के लड्डू, जिनकी खुशबू से हर घर महक उठता है. सर्द मौसम में मनाने वाला यह त्योहार न सिर्फ पतंगों और धार्मिक आस्था से जुड़ा है बल्कि खानपान और पारिवारिक परंपराओं का भी अहम हिस्सा है. बघेलखंड में मकर संक्रांति का मतलब ही होता है तिल, गुड़ और देसी घी से बने लड्डू, जिन्हें बड़े प्रेम और श्रद्धा के साथ तैयार किया जाता है. लोकल 18 से बातचीत में स्थानीय निवासी मीणा द्विवेदी बताती हैं कि मकर संक्रांति पर तिल के लड्डू बनाना बघेलखंड के हर परिवार में एक अनिवार्य परंपरा सी बन गई है और यह परंपरा सिर्फ स्वाद तक सीमित नहीं है बल्कि इसके पीछे सेहत और संस्कृति दोनों जुड़ी हुई हैं. बुजुर्गों का मानना है कि तिल शरीर को गर्मी देता है और सर्दियों में होने वाली कई परेशानियों से बचाता है. यही कारण है कि इस पर्व पर तिल और गुड़ से बने व्यंजन विशेष रूप से बनाए जाते हैं.

मकर संक्रांति से एक-दो दिन पहले ही घरों में तैयारियां शुरू हो जाती हैं. लड्डू बनाने के लिए 250 ग्राम सफेद तिल, 250 ग्राम गुड़, दो बड़े चम्मच देसी घी, आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर और स्वाद बढ़ाने के लिए कटे हुए काजू, बादाम या पिस्ता का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले सफेद तिलों को साफ कर लिया जाता है और फिर एक भारी तले की कड़ाही में मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए भूना जाता है. तिलों को तब तक भूनना होता है, जब तक वे हल्के भूरे न हो जाएं और उनसे खुशबू आने न लगे. इस दौरान खास ध्यान रखा जाता है कि तिल ज्यादा न भुने क्योंकि इससे उनका स्वाद कड़वा हो सकता है.

तैयार करें गुड़ की चाशनी
फिर भुने हुए तिलों को एक प्लेट में निकालकर ठंडा किया जाता है. ठंडा होने के बाद तिलों का लगभग एक चौथाई हिस्सा अलग रख दिया जाता है और बाकी तिलों को मिक्सी में दरदरा पीस लिया जाता है. इसके बाद उसी कड़ाही में देसी घी गर्म कर उसमें कटा हुआ गुड़ डालकर धीमी आंच पर पिघलाया जाता है. गुड़ को लगातार चलाया जाता है ताकि वह जले नहीं और कुछ ही मिनटों में जब गुड़ पूरी तरह पिघलकर हल्की चाशनी जैसा हो जाए, तब आंच बंद कर दी जाती है. अब इसमें पिसे हुए तिल, साबुत तिल, इलायची पाउडर और कटे हुए मेवे डालकर अच्छी तरह मिला लिया जाता है. यह मिक्सचर जब थोड़ा ठंडा हो जाए और हाथों से छूने लायक हो जाए, तब हाथों पर हल्का सा घी लगाकर गोल-गोल लड्डू बना लिए जाते हैं.

मकर संक्रांति की असली पहचान
इस तरह तैयार तिल के लड्डू स्वाद में जितने लाजवाब होते हैं, उतने ही पौष्टिक भी होते हैं. इन्हें एयरटाइट डिब्बे में 10 से 15 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है. बघेलखंड में मकर संक्रांति के दिन इन लड्डुओं का आदान-प्रदान रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बीच भी किया जाता है, जो आपसी प्रेम और एकता को दर्शाता है. यही वजह है कि तिल के लड्डू बघेलखंड में सिर्फ मिठाई नहीं बल्कि मकर संक्रांति की असली पहचान माने जाते हैं.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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