15 या 16 जनवरी? माघ का पहला प्रदोष व्रत कब, सही तिथि-पूजा विधि-शुभ मुहूर्त

15 या 16 जनवरी? माघ का पहला प्रदोष व्रत कब, सही तिथि-पूजा विधि-शुभ मुहूर्त


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Pradosh Vrat in January: शुक्रवार को पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत से व्यक्ति के जीवन खुशहाली आती है और शत्रुओं पर विजय मिलती है.

उज्जैन. हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का खास महत्व माना गया है. यह व्रत हर महीने के दोनों पक्षों शुक्ल और कृष्ण की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है. मान्यता है कि प्रदोष काल में की गई पूजा से भक्तों के सभी दुख-दर्द दूर होते हैं. दरअसल एक महीने में दो बार प्रदोष व्रत होते हैं. इस दिन सुबह से लेकर शाम तक व्रत किया जाता है और भगवान शिव समेत उनके पूरे परिवार की आराधना की जाती है. साथ ही विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद व्रत का पारण किया जाता है. आइए जानते हैं उज्जैन के पंडित आनंद भारद्वाज से जनवरी के महीने में माघ माह का पहला प्रदोष व्रत कब आ रहा है और इसका धार्मिक महत्व क्या है.

कब मनाया जाएगा प्रदोष व्रत?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी को रात 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो रही है. इस तिथि का समापन 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा. ऐसे में जनवरी का प्रदोष व्रत 16 जनवरी दिन शुक्रवार को किया जाएगा. पूजा के शुभ मुहूर्त की बात करें, तो शाम 5 बजकर 47 मिनट से रात 8 बजकर 29 मिनट तक पूजा का शुभ मुहूर्त रहेगा.

शुक्र प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शुक्रवार के दिन पड़ने की वजह से इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, शुक्र प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति के जीवन खुशहाली आती है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके साथ ही जीवन के सभी संकटों से छुटकारा मिलता है. खासतौर पर विवाहित महिलाएं इस व्रत को पति की लंबी आयु और सुख-सौभाग्य में वृद्धि के लिए रखती हैं.

जरूर करें इन चीजों का दान
शुक्रवार का दिन मां लक्ष्मी और शुक्रदेव को समर्पित है. साथ ही शिव जी को भी सफेद रंग की वस्तुएं प्रिय हैं. ऐसे में शुक्र प्रदोष व्रत के दिन दूध, दही, सफेद मिठाई और सफेद वस्त्र दान करने चाहिए. साथ ही जरूरतमंदों को अन्न, फल, धन और कपड़े दान करें.

जरूर करें इन नियमों का पालन
प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें. पूजा स्थल की अच्छे से सफाई करके भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें. इसके बाद शिव परिवार का पूजन करें और भगवान शिव पर बेल पत्र, फूल, धूप, दीप आदि अर्पित करें. प्रदोष व्रत की कथा का पाठ करें. पूजा के अंत में भगवान शिव की आरती करें और शिव चालीसा का पाठ जरूर करें. इसके बाद ही अपना उपवास खोलें.

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Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.



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