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साल 1988, मुकाबला था ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के बीच. वेस्टइंडीज़ उस दौर में दुनिया की सबसे ख़तरनाक टीम मानी जाती थी, और उसके बल्लेबाज़ों को आउट करना किसी सपने से कम नहीं था. लेकिन मर्व ह्यूज उस दिन किसी मिशन पर थे. ह्यूज ने दो दिन में तीन ओवरों में एक-एक विकेट झटका. जब तीन ओवरों में 3 विकेट पड़े और बन गई ‘हैट्रिक’ मर्व ह्यूज़ का अनोखा रिकॉर्ड.
नई दिल्ली. क्रिकेट के इतिहास में कुछ लम्हे ऐसे होते हैं जो आँकड़ों से नहीं, किस्सों से ज़िंदा रहते हैं.हैट्रिक आमतौर पर तीन गेंदों पर तीन विकेट लेने को कहा जाता है, लेकिन अगर कोई गेंदबाज़ तीन अलग-अलग ओवरों में तीन विकेट लेकर भी हैट्रिक बना दे, तो वो पल इतिहास बन जाता है.
1988 में ऑस्ट्रेलिया के दिग्गज तेज़ गेंदबाज़ मर्व ह्यूज ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ ठीक यही कर दिखाया और क्रिकेट की परिभाषाओं को ही चुनौती दे दी.
साल 1988, मुकाबला था ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के बीच. वेस्टइंडीज़ उस दौर में दुनिया की सबसे ख़तरनाक टीम मानी जाती थी, और उसके बल्लेबाज़ों को आउट करना किसी सपने से कम नहीं था. लेकिन मर्व ह्यूज उस दिन किसी मिशन पर थे. ह्यूज ने दो दिन में तीन ओवरों में एक-एक विकेट झटका. जब तीन ओवरों में 3 विकेट पड़े और बन गई ‘हैट्रिक’ मर्व ह्यूज़ का अनोखा रिकॉर्ड.
ह्यूज की अनोखी हैट्रिक
क्रिकेट इतिहास में कुछ क्षण ऐसे होते हैं जिन्हें सिर्फ आँकड़े नहीं, बल्कि उनकी अनोखी कहानी भी बना देती है. दिसंबर 1988 में पर्थ (WACA) में खेला गया ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज़ के बीच टेस्ट मैच भी ऐसा ही था. इस खेल में ऑस्ट्रेलिया के बुलंद मूंछों वाले तेज़ गेंदबाज़ मर्व ह्यूज़ ने एक ऐसा कारनामा़ किया, जो आज भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में ज़िंदा है. आम तौर पर हैट्रिक का मतलब होता है तीन लगातार गेंदों पर तीन विकेट. लेकिन ह्यूज़ ने यह कारनामा तीन अलग-अलग ओवरों में, दो अलग-अलग पारियों में किया. और फिर भी ये तकनीकी रूप से एक वैध टेस्ट हैट्रिक बन गई ह्यूज़ ने कर्टली एंबरोस को पहली पारी में 36वें ओवर की अंतिम ओवर की आख़िरी गेंद पर विकेट लिया. अगले ओवर यानि 37वें ओवर की पहली गेंद पर ह्यूज ने पैटरसन को आउट कर वेस्टइंडीज़ की पारी को समेट दिया.एक दिन के बाद जब वेस्टइंडीज की दूसरी पारी शुरु हुई तो ओपनर गॉर्डन ग्रीनिज को ह्यूज़ ने पहली ही गेंद पर उन्हें LBW आउट कर हैट्रिक पूरी की.
ह्यूज का करियर
मर्व ह्यूज ने अपने टेस्ट करियर में 53 मैच खेले और कुल 212 विकेट लेने में सफल रहे. वनडे में ऑस्ट्रेलिया के पूर्व गेंदबाज के नाम 33 मैच में 38 विकेट दर्ज है. मूंछें हो तो तो नत्थूलाल जैसी’ वरना न हो. यह डायलॉग फ़िल्म ‘शराबी’ का है जिसे महानायक अमिताभ बच्चन ने बोला था. फिल्म जगत में यह डायलॉग कभी पॉपुलर हुआ था. ऐसे ही क्रिकेत जगत में मर्व ह्यूज अपनी गेंदबाजी के अलावा अपनी बड़ी- बड़ी मूंछों के लिए भी काफी सुर्खियों बटोरने में सफल रहे थे. आईसीसी ने भी उनकी मूंछों की तारीफ की थी.