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Annapurna Temple in Indore: भारतीय द्रविड़ शैली में बने अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नपूर्णा देवी के साथ ही मां गायत्री और सरस्वती भी विराजमान है. तीन मूर्तियों का संगम ज्ञान, शक्ति और भोजन का प्रतीक है. बताया जाता है कि यहां के अन्य क्षेत्र में कभी भजन काम नहीं पड़ता चाहे हजारों की भीड़ क्यों न आ जाए. इसे माता का चमत्कार माना जाता है.
इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र में करीब 70 साल पुराना मां अन्नपूर्णा मंदिर मौजूद है. जहां कभी भक्तों के लिए प्रसाद भंडार खत्म नहीं होता. अन्नपूर्णा मंदिर में प्रवेश करते ही आपको लगेगा कि आप किसी दक्षिण भारत के मंदिर में आ गए है. मदुरई के मीनाक्षी मंदिर के तर्ज पर यहां एक विशाल गेट द्वार बना है. मान्यता है कि अन्नपूर्णा मंदिर में भक्त गुप्त रूप से मनोकामना करते है जो अवश्य पूर्ण होती है.
भारतीय द्रविड़ शैली में बने अन्नपूर्णा मंदिर में अन्नपूर्णा देवी के साथ ही मां गायत्री और सरस्वती भी विराजमान है. तीन मूर्तियों का संगम ज्ञान, शक्ति और भोजन का प्रतीक है. बताया जाता है कि यहां के अन्य क्षेत्र में कभी भजन काम नहीं पड़ता चाहे हजारों की भीड़ क्यों न आ जाए. इसे माता का चमत्कार माना जाता है.
मान्यता है कि यहां जो भी सच्चे मन से आता है. उसके घर में कभी अन्न और धन की कमी नहीं होती. मुख्य मंदिर के अलावा यहां भगवान शिव, हनुमान जी और काल भैरव के भी सुंदर मंदिर है. प्रवेश द्वार पर चार बड़े हाथियों की मूर्तियां सजी है जो ऐसा आभास कराती है मानो वे साक्षात माता के पहरेदार हो. पूरे मंदिर को भव्य रूप से संगमरमर से बनाया गया है. बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं की इतनी बारीक कलाकृति तैयार की गई है कि घंटों देखने पर भी मन नहीं भरता. रात के समय जब मंदिर रोशनी से नहाता है, तो इसकी सुंदरता देखते ही बनती है.
इस मंदिर का निर्माण महामंडलेश्वर स्वामी प्रबोधानंद गिरी जी महाराज ने कराया था. वो केवल एक संत ही नहीं, बल्कि एक महान विद्वान और दूरदर्शी व्यक्तित्व के धनी थे. उनका मानना था कि मंदिर केवल पूजा-पाठ की जगह नहीं, बल्कि समाज सुधार और संस्कार का केंद्र होना चाहिए।. उन्होंने ही यहां भंडारा, गौशाला का संचालन और शिक्षा के क्षेत्र में मदद जैसे कार्यों की शुरुआत की थी. कहा जाता है कि स्वामी जी की साधना इतनी प्रखर थी कि लोग उनके सानिध्य मात्र से ही शांति महसूस करते थे।.