मुंह में जाते ही घुल जाएगी ये मिठाई, दूध ज्यादा… चीनी कम, सिर्फ इसे खरीदने यहां ट्रेन से उतरते हैं लोग


Last Updated:

Kalakund Ka Kalakand: इंदौर-खंडवा रेलमार्ग पर एक स्टेशन है, जहां पर ज्यादातर यात्री एक विशेष मिठाई की खरीदी के लिए उतरते हैं. ट्रेन भी कुछ देर ठहतरी है. इस मिठाई का स्वाद आज से नहीं, बल्कि अंग्रेजों के जमाने से मशहूर है. जानें रेसिपी और दिलचस्प कहानी…

Kalakund Ka Kalakand: इंदौर के नमकीन और पोहा जलेबी के बारे में तो आपने खूब सुना ही होगा, लेकिन क्या इंदौर में बनने वाले खास कलाकंद के बारे में आप जानते हैं?  सफेद रंग की यह दानेदार और मुंह में घुल जाने वाली मिठाई न केवल इंदौरियों की पसंद है, बल्कि अब यह शहर की पहचान भी बन चुकी है. इसकी कीमत 500 रुपए प्रति किलो है.

राजवाड़ा बाजार में 75 साल से कलाकंद की दुकान पर मौजूद कंवल जोशी ने बताया, इस कलाकंद की सबसे बड़ी खासियत इसकी नमी और दानेदार बनावट है. इसे काले गुलाब जामुन या रबड़ी के साथ खाया जाता है. अन्य मिठाइयों की तुलना में इसमें शक्कर कम होती है और दूध का असली स्वाद आता है. इसे बनाने में सिर्फ दूध, चीनी और थोड़ी सी फिटकरी या नींबू का इस्तेमाल होता है, जिससे यह बहुत ही शुद्ध होती है.

इसलिए नाम पड़ा कलाकंद
इस कलाकंद के बनने की दिलचस्प कहानी भी है. इंदौर के पास कालाकुंड नाम के एक छोटे से रेलवे स्टेशन ने इसे नई पहचान दी‌ है. दरअसल आजादी के बाद, जब रेल मार्ग से दूध की सप्लाई होती थी, तो अक्सर दूध बच जाता या फट जाता था. ऐसे में वहां के स्थानीय लोगों ने फटे दूध को शक्कर के साथ पकाकर एक नई मिठाई इजाद की. चूंकि, यह मिठाई कालाकुंड में बनी थी, इसलिए इसे कालाकुंड के कलाकंद के नाम से जाना जाने लगा. इंदौर-खंडवा रेल लाइन पर चलने वाली ट्रेनों में कालाकुंड स्टेशन पर आज भी लोग सिर्फ इस कलाकंद के लिए उतरते हैं.

केक की तरह भी खाया जाता
कलाकंद में शुद्ध रूप से मावा, रबड़ी और हल्की शक्कर का स्वाद आता है. ‌कई लोग इसे गरमा-गरम खाना पसंद करते हैं, तो कुछ इसे फ्रिज में ठंडा करके केक की तरह भी खाते हैं. व्रत और त्योहारों पर कलाकंद की इंदौर में खास डिमांड रहती है. क्योंकि यह शुद्ध रूप से दूध और मावे से बनता है, इसलिए इसकी कीमत भी 500 से 600 रुपए प्रति किलो होती है.

यहां आकर उठाइए लुत्फ
अगर आप मिठास के शौकीन हैं तो इंदौर में कुछ खास जगह जैसे सराफा बाजार के कोने पर श्री कृष्णा मिष्ठान भंडार, सपना संगीता छावनी और 56 दुकान पर भी इसका लुत्फ उठा सकते हैं. वहीं इंदौर से कुछ ही दूरी पर पहाड़ियों के बीच स्थित कालाकुंड जाकर भी आप कलाकंद का आनंद ले सकते हैं.

About the Author

Rishi mishra

एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें

homemadhya-pradesh

मुंह में जाते ही घुल जाएगी मिठाई, दूध ज्यादा, चीनी कम, इसकी कहानी भी दिलचस्प



Source link