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IAS Sanskriti Jain: सिवनी की पूर्व कलेक्टर संस्कृति जैन की ‘गिफ्ट ए डेस्क’ मुहिम को SKOCH Gold Award मिला है. बिना सरकारी बजट के शुरू इस अभियान से अब तक 17 हजार से ज्यादा डेस्क-बेंच स्कूलों तक पहुंचे हैं और करीब 40 हजार बच्चे जमीन की जगह डेस्क पर बैठकर पढ़ रहे हैं.
भोपाल: मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल सिवनी जिले में शिक्षा से जुड़ा एक छोटा-सा विचार आज देशभर के लिए मिसाल बन गया है. सरकारी स्कूलों में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर बच्चों के लिए शुरू की गई ‘गिफ्ट ए डेस्क’ मुहिम को अब देश का प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award मिला है. यह सम्मान उस सोच का है, जिसने बिना सरकारी बजट के हजारों बच्चों की पढ़ाई का तरीका बदल दिया.
यह हेडिंग इसलिए पूरी तरह जस्टिफाई होती है, क्योंकि सिवनी की तत्कालीन कलेक्टर संस्कृति जैन ने प्रशासनिक पद को सिर्फ फाइलों तक सीमित न रखकर ज़मीनी बदलाव का जरिया बनाया. उनके इस ‘मास्टरस्ट्रोक’ ने बच्चों को जमीन से उठाकर डेस्क-बेंच तक पहुंचाया और अब उसी पहल को दिल्ली में आयोजित 105वें SKOCH Summit में गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है.
क्या है ‘Gift a Desk’ अभियान?
‘गिफ्ट ए डेस्क’ एक जनभागीदारी आधारित अभियान है, जिसकी शुरुआत तब हुई जब संस्कृति जैन ने देखा कि सरकारी प्रायमरी स्कूलों में बच्चे दरी, टाट-पट्टी या जमीन पर बैठकर पढ़ रहे हैं. उन्होंने तय किया कि बच्चों को पढ़ाई के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित व्यवस्था मिलनी चाहिए, लेकिन बिना अतिरिक्त सरकारी खर्च के.
कैसे बदली सरकारी स्कूलों की तस्वीर?
इस अभियान के तहत आम नागरिकों से लेकर उद्योगपतियों, सेलेब्रिटी और विदेशों में रहने वाले भारतीयों तक ने स्कूलों के लिए डेस्क-बेंच गिफ्ट किए. इसके लिए एक अलग वेबसाइट, कॉल सेंटर और पारदर्शी सिस्टम तैयार किया गया, ताकि दानदाता अपनी पसंद का स्कूल और वेंडर चुन सकें. हर डेस्क पर गिफ्ट देने वाले का नाम भी दर्ज किया गया.
क्यों खास है यह मॉडल?
यह मुहिम इसलिए खास मानी जा रही है क्योंकि इसमें सरकार, समाज और सिस्टम तीनों की भागीदारी दिखती है. प्रशासन ने पहल की, समाज ने सहयोग दिया और नतीजा बच्चों की आंखों में खुशी के रूप में सामने आया. बिना बजट के इतना बड़ा बदलाव प्रशासनिक नवाचार का उदाहरण बन गया.
अब तक क्या हासिल हुआ?
- अब तक 17,000 से ज्यादा डेस्क-बेंच स्कूलों तक पहुंचे
- करीब 40,000 छात्र अब जमीन की जगह डेस्क पर बैठकर पढ़ रहे हैं
- देश-विदेश से लोगों ने अभियान में भागीदारी की
- शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बड़ा सुधार हुआ
SKOCH Gold Award क्यों मायने रखता है?
SKOCH Award देश के प्रतिष्ठित गवर्नेंस और सोशल इनोवेशन अवॉर्ड्स में से एक माना जाता है. ‘गिफ्ट ए डेस्क’ को गोल्ड अवॉर्ड मिलना इस बात की पुष्टि है कि यह सिर्फ एक स्थानीय प्रयोग नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनाने लायक मॉडल है. संस्कृति जैन की यह पहल दिखाती है कि अगर सोच ईमानदार हो तो बदलाव के लिए बड़े बजट की जरूरत नहीं होती. ‘गिफ्ट ए डेस्क’ आज सिवनी की पहचान बन चुका है और यह साबित करता है कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति समाज की मदद से चमत्कार कर सकती है.
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सुमित वर्मा, News18 में 4 सालों से एसोसिएट एडीटर पद पर कार्यरत हैं. बीते 3 दशकों से सक्रिय पत्रकारिता में अपनी अलग पहचान रखते हैं. देश के नामचीन मीडिया संस्थानों में सजग जिम्मेदार पदों पर काम करने का अनुभव. प…और पढ़ें