बलुआ पत्थर की चट्टान से निर्मित हैं बाघ की नौ गुफाओं का समूह, अंदर की कलाकृतियां देख आ जाती है आदिमानव की याद

बलुआ पत्थर की चट्टान से निर्मित हैं बाघ की नौ गुफाओं का समूह, अंदर की कलाकृतियां देख आ जाती है आदिमानव की याद


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Indore news: भीम बेटका से लेकर खजुराहो तक आदिकाल के मानव जीवन के अवशेष मिलते हैं. लेकिन इंदौर से करीब 150 किलोमीटर दूर एक ऐसी दगह है जहां आदिमानव कालीन गुफाएं मौजूद है और यहां की आकर्षक बौद्ध कृतियों को देखने विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं.

मध्य प्रदेश अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से शुरू से ही इंसानी बस्ती के लिए महत्वपूर्ण जगह रही है. भीम बेटका से लेकर खजुराहो तक आदिकाल के मानव जीवन के अवशेष मिलते हैं. लेकिन इंदौर से करीब 150 किलोमीटर दूर एक ऐसी दगह है जहां आदिमानव कालीन गुफाएं मौजूद है और यहां की आकर्षक बौद्ध कृतियों को देखने विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं.

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मध्य प्रदेश के धार जिले में पहाड़ियों के बीच छिपी ‘बाघ की गुफाएं’ प्राचीन भारत का खजाना है. करीब 1500 साल पुरानी ये गुफाएं हमें आदिमानव की याद दिला देती हैं जह वो अपने संवाद के लिए पत्थर और चित्रकारी का सहारा लेते थे. बाघ में उस समय के लोगों के रहन-सहन, नाच-गाने और फैशन की झलक भी देखने को मिलती है.

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बाघ की गुफाएं कुल 9 गुफाओं का एक समूह हैं, जिन्हें बलुआ पत्थर की चट्टानों को काटकर बनाया गया है. इनमें से गुफा संख्या 2 पांडव गुफा और गुफा संख्या 4 रंग महल सबसे ज्यादा सुरक्षित और भव्य हैं. इन गुफाओं को बनाने में जिस इंजीनियरिंग का उपयोग हुआ है, वह आज भी हैरान करती है कि कैसे बिना किसी आधुनिक मशीनरी के पहाड़ों को तराश कर इतनी सटीक आकृतियां बनाई गईं.

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ये गुफाएं बौद्ध धर्म के महायान संप्रदाय से संबंधित हैं. यहाँ के चित्रों में भगवान बुद्ध के जीवन की घटनाओं के साथ-साथ बोधिसत्वों का भी चित्रण है. यह स्थान केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं था, बल्कि यहाँ देश-विदेश से आने वाले यात्रियों और भिक्षुओं का जमावड़ा रहता था. इन गुफाओं को देखकर पता चलता है की यह बौद्ध धर्म की शिक्षा का बड़ा केंद्र रहा होगा.

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बाघ की गुफा संख्या 4 यानी रंग महल में केवल धार्मिक विषय ही नहीं, बल्कि उस समय के नाच-गाने, जुलूस, फूलों की सजावट और शाही दरबार के दृश्य भी मिलते हैं. घटनाओं का सजीव चित्रण इन कलाकृतियों में देखने को मिलता है. चित्रों में इस्तेमाल किए गए रंगों की चमक आज भी कहीं-कहीं नजर आती है, हालांकि, समय की मार और नमी के कारण कई चित्र धुंधले हो गए हैं.

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बाघ की गुफाओं काफी पुरानी है बताया जाता है कि हजारों सालों तक गुमनाम रहने के बाद, इन गुफाओं को आधुनिक दुनिया के सामने 1818 में लेफ्टिनेंट डेंजरफील्ड ने लाया. खोज के समय ये गुफाएं काफी जर्जर अवस्था में थीं और जंगली जानवरों का बसेरा बन चुकी थीं. बाद में ग्वालियर रियासत और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने इसे संजोकर इसका संरक्षण किया।‌ ये‌ गुफाएं धार जिले के पास बाग में मौजूद है.

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प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह जन्नत से कम नहीं है. इतिहास प्रेमी और आर्ट स्टूडेंट्स रिसर्च के लिए आते हैं यहाँ की शांति और बाघिनी नदी की कल-कल आवाज अद्भुत अनुभव देती है. इन गुफाओं को कम ह३ लोग जानते हैं लेकिन सरकार अब इन गुफाओं के आसपास के क्षेत्रों को विकसित कर रही है ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिल सके. यहाँ पहुँचने के लिए इंदौर या धार से सड़क मार्ग का सहारा लिया जा सकता है.

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बलुआ पत्थर की चट्टान से निर्मित हैं बाघ की नौ गुफाओं का समूह



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