फर्जी आईडी पर बनाई प्रोफाइल से हो रही ऑनलाइन सप्लाय
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जानलेवा बन चुका चाइनीज मांजा शहर में दिल्ली, यूपी, गुजरात से आ रहा है। यह खुलासा बीते डेढ़ महीने में इंदौर पुलिस द्वारा दर्ज किए गए 38 केस की जांच में हुआ है। पुलिस ने इस दौरान 54 लोगों को चाइनीज मांजे का उपयोग करने व रखने के मामले में आरोपी बनाया है।
खुद आरोपियों ने स्वीकारा कि मांजा दिल्ली में कई बड़े गोदामों में अवैध रूप से तैयार किया जा रहा है। फिर निजी ट्रेवल्स की बसों व छोटे लोडिंग वाहनों से प्रमुख शहरों में इसकी सप्लाय होती है। 60 फीसदी मुनाफे के लालच में इंदौर के व्यापारी इसे गोपनीय ढंग से स्टॉक कर अभी भी बेच रहे हैं। कई व्यापारियों ने धार, देवास व उज्जैन में गोडाउन बना रखे हैं। ये व्यापारी मांग के आधार पर शहरों में लाकर फुटकर व्यापारियों से मांजा बिकवा रहे हैं।
किसी फर्म, कंपनी के पास लाइसेंस नहीं
दिल्ली में सीलमपुर, शाहदरा, वेलकम, वहीं उत्तरप्रदेश में मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़ और गुजरात में सूरत और अहमदाबाद व राजस्थान में जयपुर इसका मुख्य गढ़ है। मुंबई की कई झुग्गी बस्तियों में भी ये तैयार हो रहा है। देश में असंगठित और अंडर ग्राउंड ढंग से ये तैयार हो रहा है। कोई रजिस्टर्ड कंपनी, फर्म या लाइसेंसधारी फैक्टरी ये नहीं बनाती।
नॉयलोन, सिंथेटिक फाइबर और कांच काट रहा गला
चाइनीज मांजा नॉयलोन व सिंथेटिक फायबर में कांच का बुरादा मिलाकर तैयार किया जा रहा है। इस पर कुछ लोग चावल का मांड भी चढ़ाकर इसे इतना कठोर कर देते हैं कि ये आसानी से टूटता नहीं है। यही मौत की वजह बनता है। इंसान की स्कीन में रगड़ से ये सीधे कट लगा देता है। इसलिए ये जानलेवा है।
2016 तक चीन से आता था, फिर देश में ही निर्माण
शहर में बीक रहा चाइनीज मांजा वर्ष 2010 से 2016 तक पहले चीन से आयात होता था। ये मछली के जाल बनाने में उपयोग होता था। ज्वेलरी मेकिंग, प्लास्टिग बैग, तिरपाल, झोले व अन्य मटेरियल्स के उपयोग के लिए आयात होता था। इसमें केमिकल और माइक्रो-ग्लास कोटिंग होती थी। भारत सरकार के प्रतिबंध के बाद इसकी बढ़ी मांग को देखते हुए इसका यहीं अवैध निर्माण शुरू हो गया।
ऑनलाइन भी आसानी से उपलब्ध
ये खतरनाक मांजा कई व्यापारियों द्वारा ऑन लाइन ई-कॉमर्स वेब साइट व पोर्टल के माध्मय से कैश ऑन डिलेवरी पर भी मिल रहा है। इसलिए इसके सप्लायरों को तलाशने में मुश्किल होती है। बैन होने के कारण कई व्यापारी इसे फर्जी नामों का उपयोग कर या अपने नंबर देकर डायरेक्ट मैसेज (डीएम) करवाकर अवैध तरीके से बेच रहे हैं।