राजभवन का वो ‘गुप्त कमरा’ जहां कोई नहीं रख सकता कदम: राष्ट्रपति और पीएम के लिए क्यों होता है खास?

राजभवन का वो ‘गुप्त कमरा’ जहां कोई नहीं रख सकता कदम: राष्ट्रपति और पीएम के लिए क्यों होता है खास?


भारत के हर राज्य की राजधानी में एक भव्य इमारत होती है, जिसे राजभवन, गवर्नर हाउस या राजनिवास कहा जाता है. यह राज्य के संवैधानिक प्रमुख, यानी राज्यपाल का निवास स्थान होता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इन आलीशान बंगलों के भीतर कुछ ऐसे कमरे और सुइट्स होते हैं, जो साल के 365 दिन खाली रहते हैं. उनकी साफ-सफाई और सुरक्षा किसी वीवीआईपी की मौजूदगी जैसी ही हर रोज होती है. ये कमरे विशेष रूप से भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए आरक्षित होते हैं. जब भी देश के ये दो सर्वोच्च पदधारी किसी राज्य के प्रवास पर जाते हैं तो उनका ‘आधिकारिक घर’ यही राजभवन होता है.

क्या हर राजभवन में होता है राष्ट्रपति और पीएम का कमरा?

प्रोटोकॉल के अनुसार देश के हर राजभवन में एक ‘प्रेसिडेंशियल सुइट’ (Presidential Suite) और एक ‘पीएम सुइट’ अनिवार्य रूप से होता है. यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब वायसराय या गवर्नर जनरल अलग-अलग प्रांतों का दौरा करते थे. आज के दौर में ये कमरे न केवल विलासिता का प्रतीक हैं, बल्कि सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं. राष्ट्रपति देश के प्रथम नागरिक हैं, इसलिए उनके लिए आरक्षित सुइट राजभवन का सबसे बड़ा और भव्य हिस्सा होता है.

राजभवन के किस कमरे में रुकते हैं पीएम और राष्ट्रपति?

राजभवन के भीतर इन कमरों के नाम अक्सर राज्य की संस्कृति या भौगोलिक विशेषता पर रखे जाते हैं. उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश के राजभवन में इन कमरों के नाम नदियों या फूलों पर हैं, तो कहीं इन्हें ‘अशोक’ या ‘हिमालय’ जैसे नाम दिए जाते हैं.

राष्ट्रपति का निवास यानी The Presidential Suite

राष्ट्रपति जिस सुइट में रुकते हैं, वह आमतौर पर मुख्य भवन के सबसे सुरक्षित हिस्से में होता है. इसमें एक विशाल मास्टर बेडरूम, एक छोटा निजी ऑफिस, एक बैठक (Dining Room) और आगंतुकों से मिलने के लिए एक अलग ‘लॉन्ज’ होता है. यहां की दीवारों पर अक्सर ऐतिहासिक पेंटिंग्स और फर्नीचर में पुरानी नक्काशी देखने को मिलती है.

प्रधानमंत्री का कमरा  यानी The PM Suite

प्रधानमंत्री के लिए आरक्षित कमरा भी इसी स्तर की सुविधाओं से लैस होता है, लेकिन यहां कार्यक्षमता (Functionality) पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है. चूंकि प्रधानमंत्री को लगातार सरकारी फाइलें देखनी होती हैं और बैठकें करनी होती हैं, इसलिए उनके सुइट में एक हाई-टेक ऑफिस और सुरक्षित संचार लाइनें (Secured Communication Lines) हमेशा तैयार रखी जाती हैं.

सुरक्षा घेरा कैसा होता है?

सुरक्षा का ऐसा घेरा कि परिंदा भी पर न मार सके जब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री राजभवन में रुकने वाले होते हैं, तो कई दिन पहले ही उस पूरे सुइट को सुरक्षा एजेंसियां अपने कब्जे में ले लेती हैं. 24 घंटे SPG और NSG का पहरा होता है. प्रधानमंत्री की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली एसपीजी उस कमरे की चप्पे-चप्पे की जांच करती है. यहां तक कि कमरे के भीतर के फोन लाइन्स और वाई-फाई को भी एन्क्रिप्ट किया जाता है.

कैसे गुप्त कमरे में एंटी-बग चेक होता है?

खुफिया एजेंसियां यह सुनिश्चित करती हैं कि कमरे के भीतर कोई सुनने वाला उपकरण (Listening Device) या गुप्त कैमरा न लगा हो.

बुलेटप्रूफ इंतज़ाम: कई राजभवनों में राष्ट्रपति और पीएम के कमरों की खिड़कियों पर बुलेटप्रूफ कांच लगे होते हैं.

इन कमरों के भीतर की दुनिया कैसी होती है?

इन कमरों का इंटीरियर राज्य की झलक पेश करता है. अगर आप राजस्थान के राजभवन में हैं, तो राष्ट्रपति के कमरे में आपको राजपूताना वैभव दिखेगा, वहीं केरल में सादगी और लकड़ी का बेहतरीन काम नजर आएगा. इन सुइट्स में एक निजी रसोई की सुविधा भी होती है, जहाँ केवल प्रमाणित रसोइया ही उनके लिए भोजन तैयार कर सकता है. भोजन परोसने से पहले उसकी जांच की जाती है. साथ ही, इन कमरों के पास एक छोटा ‘मेडिकल रूम’ भी अस्थाई रूप से बनाया जाता है, जहाँ आपातकालीन स्थिति के लिए सभी उपकरण मौजूद होते हैं.

सिर्फ राष्ट्रपति-पीएम ही नहीं, और कौन रुक सकता है? नियमों के मुताबिक, ये सुइट्स केवल राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के लिए होते हैं. हालांकि, बहुत विशेष परिस्थितियों में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) या विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को राज्यपाल की अनुमति से यहां ठहराया जा सकता है. लेकिन जब राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री शहर में हों, तो उस सुइट में किसी और का प्रवेश वर्जित होता है. राजभवन के ये कमरे केवल ईंट-पत्थर की दीवारें नहीं हैं, बल्कि ये भारत की संप्रभुता और प्रोटोकॉल के जीवित प्रमाण हैं. ये कमरे हमेशा तैयार रहते हैं, मानों कह रहे हों कि दिल्ली से दूर भी देश के नायकों का एक घर हर राज्य में उनका इंतज़ार कर रहा है.



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