किसान भाई कर लें अगेती भिंडी की खेती, होली से पहले हो जाएंगे मालामाल

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Agriculture News: अवनीश पटेल ने लोकल 18 से कहा कि अगर फसल में येलो वेन मोजैक के लक्षण दिखाई दें, तो फल मक्खी का फौरन नियंत्रण करें. इसके लिए इमीडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करें.

सीधी. मध्य प्रदेश के अधिकतर किसानों ने आलू की खुदाई कर ली है. इसके बाद बड़ी संख्या में खेत खाली पड़े हैं लेकिन अगर किसान चाहें तो इन खाली खेतों को सर्दी के मौसम में भी मुनाफे का साधन बना सकते हैं. जनवरी का महीना भिंडी की अगेती खेती के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. इस समय बोई गई भिंडी फरवरी के आखिर से मार्च तक तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. सीधी के कृषि सलाहकार अवनीश पटेल ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि वैज्ञानिक विधि से भिंडी की खेती करने पर लागत कम आती है, जिससे किसानों को मंडी में अधिक भाव मिल पाता है. हालांकि भिंडी की फसल में वायरस जनित रोग सबसे बड़ी चुनौती होते हैं, इसलिए बुवाई के समय से ही सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.

उन्होंने आगे कहा कि भिंडी की अच्छी फसल के लिए जमाव का मजबूत होना जरूरी है. इसके लिए बीजों को 4 से 6 घंटे पानी में भिगोकर बुवाई करनी चाहिए. कई किसान बीज रातभर भिगोकर सुबह बोते हैं, जिससे जमाव प्रतिशत बढ़ता है और पौधे स्वस्थ निकलते हैं. मजबूत शुरुआत आगे चलकर बेहतर उत्पादन की नींव बनती है.

बीज और मृदा उपचार है जरूरी
अवनीश पटेल ने कहा कि भिंडी की अगेती खेती में बीज उपचार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बुवाई से पहले बीज को कार्बेंडाजिम या थीरम से उपचारित करें. इसके साथ ही मृदा उपचार भी जरूरी है. ट्राइकोडर्मा को सड़ी हुई गोबर की खाद में मिलाकर अंतिम जुताई के समय खेत में डालने से मिट्टी जनित रोगों और येलो वेन मोजैक वायरस का खतरा कम हो जाता है.

रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन
उन्होंने कहा कि भिंडी की फसल में येलो वेन मोजैक वायरस सबसे खतरनाक रोग माना जाता है, जिससे 80 से 90 प्रतिशत तक उत्पादन प्रभावित हो सकता है. यह रोग फल मक्खी के जरिए फैलता है. ऐसे में रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करना बेहद जरूरी है. यूएस एग्रीसीड्स की HW001 और राधिका एडवांटा गोल्डन सीड्स जैसी किस्में अगेती खेती के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं.

रासायनिक और जैविक उपाय
अवनीश पटेल ने आगे कहा कि यदि फसल में येलो वेन मोजैक के लक्षण दिखाई दें, तो फल मक्खी का तुरंत नियंत्रण करें. इसके लिए इमीडाक्लोप्रिड 0.3 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें. जैविक विकल्प के तौर पर नीम ऑयल कर्नल एक्सट्रैक्ट 4 मिली प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने से भी वायरस की रोकथाम में मदद मिलती है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.

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