उज्जैन में श्री महाकाल महोत्सव का दूसरा दिन: जनजातीय लोककलाओं की बिखरी छटा, नृत्य-संगीत ने मोहा मन – Ujjain News

उज्जैन में श्री महाकाल महोत्सव का दूसरा दिन:  जनजातीय लोककलाओं की बिखरी छटा, नृत्य-संगीत ने मोहा मन – Ujjain News




उज्जैन में 14 से 18 जनवरी 2026 तक आयोजित हो रहे पांच दिवसीय श्री महाकाल महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को जनजातीय लोककलाओं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की भव्य छटा देखने को मिली। महोत्सव का उद्देश्य मध्यप्रदेश की समृद्ध जनजातीय परंपराओं, लोकनृत्यों और सांस्कृतिक विरासत को मंच प्रदान करना है। यह महोत्सव मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग के अधिष्ठान वीर भारत न्यास तथा श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति उज्जैन के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। दूसरे दिन जनजातीय नृत्य, लोककलाएं, कलायात्रा और संगीतमय प्रस्तुतियां दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहीं। ‘गुदुमबाजा’ से हुई कार्यक्रम की शुरूआत कार्यक्रम की शुरुआत डिंडोरी के अशोक कुमार मार्को और उनके साथी कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गोंड जनजातीय ‘गुदुमबाजा’ से हुई। इसके बाद डिंडोरी के दयाराम और उनके दल ने बैगा जनजातीय ‘कर्मा नृत्य’ की मनमोहक प्रस्तुति देकर समां बांध दिया। सागर के मनीष यादव और उनके साथियों ने ‘बरेदी नृत्य’ प्रस्तुत किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। वहीं धार के मनीष सिसोदिया और उनके दल ने भील जनजातीय ‘भगोरिया नृत्य’ की रंगारंग प्रस्तुति देकर माहौल को उत्सवमय बना दिया। उज्जैन के कलाकारों ने कलायात्रा निकाली महोत्सव के दौरान उज्जैन के मुकेश शास्त्री और उनके साथियों ने कलायात्रा निकाली। डमरू वादन दल की विशेष भागीदारी वाली यह कलायात्रा रामघाट से प्रारंभ होकर हरसिद्धि पाल और बड़ा गणेश होते हुए श्री महाकाल महालोक तक पहुंची। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-डमरू की गूंज और लोककलाओं की झलक ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।



Source link