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Sidhi news: आम के पेड़ों में दीमक से बचाव के लिए सबसे पहले तने पर लगी दीमक और मिट्टी को खुरचकर अच्छी तरह साफ करना चाहिए. इसके बाद 1 लीटर चूने के घोल में 5 ग्राम ब्लिटॉक्स और 2.5 मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफ़ॉस मिलाकर घोल तैयार करें. इस घोल को ब्रश की मदद से दीमक प्रभावित हिस्से पर गहरी पुताई करें.
सीधीः आम उत्पादन के प्रमुख राज्यों में शामिल है. खासकर विंध्य क्षेत्र का सुंदरजा आम देश ही नहीं विदेशों तक पहचान बना चुका है. इन दिनों आम के बागों में बौर आने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जो किसानों के लिए बेहद अहम समय माना जाता है. इसी बीच कई बागों में आम के पेड़ों पर दीमक का प्रकोप देखने को मिल रहा है, जो समय रहते नियंत्रित न किया गया तो भारी नुकसान का कारण बन सकता है.
दीमक आम के पेड़ों की जड़ों और तने के अंदरूनी हिस्सों को धीरे-धीरे खोखला कर देती है. इसका असर सीधे पेड़ की बढ़वार पर पड़ता है. पत्तियां पीली होने लगती हैं, नई कोपलों का विकास रुक जाता है और फलन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है. यदि दीमक का प्रकोप लंबे समय तक बना रहे, तो पूरा पेड़ सूखकर नष्ट होने की आशंका भी रहती है. ऐसे में बौर और मंजर आने से पहले दीमक पर नियंत्रण करना बेहद जरूरी हो जाता है.
आम की खेती पर नहीं लगेंगे दीमक
माली रामसिया पटेल ने लोकल 18 से जानकारी देते हुए बताया कि बागवानी किसानों के लिए आम की खेती काफी लाभकारी है, लेकिन दीमक जैसी समस्याएं कई बार किसानों की मेहनत पर पानी फेर देती हैं. यदि इस समय दीमक सक्रिय रही, तो नुकसान और अधिक बढ़ सकता है. माली रामसिया पटेल ने बताया कि आम के पेड़ों में दीमक से बचाव के लिए चूना, ब्लिटॉक्स और क्लोरोपाइरीफ़ॉस से तैयार घोल काफी असरदार माना जाता है. चूने में कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन, जिंक और मैंगनीज़ जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो पेड़ों को मजबूती देने के साथ-साथ कीट और रोगों से लड़ने की क्षमता भी बढ़ाते हैं. क्लोरोपाइरीफ़ॉस एक प्रभावी कीटनाशक है, जो दीमक और अन्य कीटों को नष्ट करने में सहायक होता है, जबकि ब्लिटॉक्स एक व्यापक स्पेक्ट्रम वाला कवकनाशी है, जो फफूंद और जीवाणु जनित रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है.
इस घोल का करें छिड़काव
50 वर्षों से आम की खेती कर रहे सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि दीमक प्रभावित पेड़ों के तने को पहले अच्छी तरह खरोंचकर दीमक और मिट्टी साफ कर देनी चाहिए. इसके बाद 1 लीटर चूने के घोल में 5 ग्राम ब्लिटॉक्स और 2.5 मिलीलीटर क्लोरोपाइरीफ़ॉस मिलाकर घोल तैयार करें. इस घोल को ब्रश की मदद से दीमक प्रभावित हिस्से पर गहरी पुताई करें. इससे दीमक की समस्या से स्थायी रूप से राहत मिलती है. इसके अलावा, जिन स्थानों पर दीमक का प्रकोप अधिक हो, वहां पुराने और ज्यादा खट्टे दही का घोल बनाकर स्प्रे करने से भी फायदा मिलता है. यह देसी उपाय कम लागत में प्रभावी साबित होता है। इन सरल तकनीकों को अपनाकर किसान आम के पेड़ों को दीमक से बचा सकते हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें