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Sagar news: चीतों को जिस जगह पर रखा जाएगा उसके लिए करीब 10 किलोमीटर की एरिया में फेंसिंग की जा रही है. इसमें करीब 8 से 10 फीट ऊंची जालियां होगी. 6 फीट चैनलिंग जलियां और इसी को सपोर्ट करने के लिए हनी कॉम जाली होगी, इन दोनों जालियों के ऊपर जो गैप होगा उसमें घुमावदार इलेक्ट्रिक फेंसिंग वाली जाली होगी और इसमें करंट दौड़ेगा.
सागर: मध्य प्रदेश के सबसे बड़े नौरादेही टाइगर रिजर्व में जल्द ही चीतों की आमद होने वाली है. क्योंकि इसे चीतों के तीसरे घर के रूप में चिन्हित किया गया है. और इसको लेकर जोर-जोर से तैयारी की जा रही है. लेकिन इस जंगल में चीता लाने से पहले सुरक्षा की दृष्टि से इनके लिए सॉफ्ट रिलीज बोमा और क्वॉरेंटाइन वोमा बनाए जा रहे हैं और इन बोम्मा को बनाने में अफ्रीकन स्टाइल में फेंसिंग की जा रही है जो तीन लेयर में होगी.
10 किलोमीटर में होगी फेंसिंग
चीतों को जिस जगह पर रखा जाएगा उसके लिए करीब 10 किलोमीटर की एरिया में फेंसिंग की जा रही है. इसमें करीब 8 से 10 फीट ऊंची जालियां होगी. 6 फीट चैनलिंग जलियां और इसी को सपोर्ट करने के लिए हनी कॉम जाली होगी, इन दोनों जालियों के ऊपर जो गैप होगा उसमें घुमावदार इलेक्ट्रिक फेंसिंग वाली जाली होगी और इसमें करंट दौड़ेगा ताकि शिकारी से भी इनका बचाव हो सके, इन जालियों के बीच में सोलर लाइट वाले खंभे भी लगाए जाएंगे इनसे जो बिजली जेनरेट होगी वही इन कटीले तारों में दौड़ेगी.
मार्च तक पूरा हो जाएगा इंतजाम
मार्च महीने के अंत तक इनको लेकर पूरी तैयारी हो जाएंगी. यहां पर अफ्रीका के नामीबिया या फिर कूनो से दोनों जगह में से एक जगह से दो जोड़ी चीतों लाए जाएंगे. बुंदेलखंड में गर्मी थोड़ी अधिक पड़ती है और अप्रैल के महीने में इसका असर भी दिखाई देने लगता है. ऐसे में एक्सपर्ट का मानना है कि अगर इनको जुलाई के महीने में लाया जाए तो यह बहुत अच्छे से यहां की परिस्थितियों में सरवाइव कर सकेंगे. वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व deputy director डॉक्टर ए ए अंसारी बताते हैं की सबसे पहले तो जो साइट सिलेक्शन का काम था वह फाइनल हो चुका है.
टाइगर, तेंदुआ, और चीता एक साथ एक जंगल में होंगे
यहां खंबे लगाने के लिए गड्ढे किए जा रहे हैं . साथ ही जो स्पेशल मटेरियल मंगवाना है उसके लिए टेंडर हो चुका है टेंडर खुलने के बाद मटेरियल आएगा और फिर आगे का काम भी शुरू हो जाएगा. लेकिन इस दौरान इन तीन रंगों में साफ सफाई से लेकर रास्ते बनाने का काम चल रहा है. अफ्रीका में जिस तरह की फेंसिंग का उपयोग किया जाता है. उसे थोड़ी इंप्रूव्ड वाली गांधी सागर में इस्तेमाल की गई है. उसी की तरह हम लोग यहां पर चैनलिंग फेंसिंग हनीकॉन्ब और सोलर फेसिंग लगा रहे क्योंकि यह टाइगर का भी एरिया है. अभी हम लोगों ने चार सॉफ्ट और चार क्वॉरेंटाइन बोमा बनाने को लेकर काम शुरू किया है. एशिया का यह पहला ऐसा टाइगर रिजर्व होगा जहां पर टाइगर तेंदुआ और चीता एक साथ एक जंगल में होंगे.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें