लोकायुक्त ने रिश्वत केस की मूल फाइल गुमा दी: हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका पर की सुनवाई, कहा- विवेचना अधिकारी पर हो FIR – Jabalpur News

लोकायुक्त ने रिश्वत केस की मूल फाइल गुमा दी:  हाईकोर्ट ने आरोपी की याचिका पर की सुनवाई, कहा- विवेचना अधिकारी पर हो FIR – Jabalpur News



मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लोकायुक्त से जुड़े रिश्वत मामले को लेकर एक याचिका दायर की गई। याचिका में बताया गया कि लोकायुक्त ने ट्रायल कोर्ट में लंबित मामले की मूल केस डायरी (फाइल) गुमा दी है।

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लोकायुक्त ने ट्रायल कोर्ट में यह कहते हुए सत्यापित काॅपी पेश की कि मूल कॉपी संभवतः गुम हो गई है। ट्रायल कोर्ट ने सत्यापित कॉपी को स्वीकार कर सुनवाई आगे बढ़ा दी, जिसे आवेदक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

आवाज नमूने से संबंधित मूल केस डायरी के गुम होने पर हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने इसे बेहद गंभीर लापरवाही मानते हुए पुलिस महानिदेशक, विशेष पुलिस स्थापना (लोकायुक्त), भोपाल को निर्देश दिए कि तत्काल दोषी विवेचना अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए।

साथ ही अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए तीन दिन के भीतर लोकायुक्त के रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष रिपोर्ट पेश की जाए। हालांकि भ्रष्टाचार से जुड़ा मूल मामला ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगा।

याचिकाकर्ता रिश्वत लेते पकड़ाया था

अगस्त 2019 में जबलपुर लोकायुक्त पुलिस ने लोक निर्माण विभाग में पदस्थ हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक को 3 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। यह मामला जीपीएफ राशि जारी कराने से जुड़ा था। शंकरलाल की शिकायत पर लोकायुक्त ने कार्रवाई की थी। 2021 में यह मामला ट्रायल कोर्ट पहुंचा, जहां सुनवाई शुरू हुई।

लगातार सुनवाई के बाद 17 अक्टूबर 2023 को ट्रायल कोर्ट ने लोकायुक्त को निर्देश दिए कि आरोपी की आवाज से संबंधित नमूने और दस्तावेज रिकॉर्ड पर पेश किए जाएं। इसके जवाब में लोकायुक्त ने सत्यापित कॉपी पेश करते हुए बताया कि मूल फाइल संभवतः गुम हो गई है।

ट्रायल कोर्ट ने सत्यापित कॉपी स्वीकार कर सुनवाई शुरू कर दी, जिसे आरोपी अनिल कुमार ने हाईकोर्ट में चुनौती दी और सवाल उठाया कि मूल फाइल आखिर कैसे गुम हो सकती है।

वकील बोले- फाइल का गुम होना गंभीर लापरवाही

जनवरी 2026 में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने कोर्ट को बताया कि सरकारी विभाग में कोई भी फाइल मूल्यवान सुरक्षा (वैल्यूएबल सिक्योरिटी) की तरह होती है और उसका इस तरह गुम होना गंभीर लापरवाही दर्शाता है। इस पर कोर्ट ने लोकायुक्त एसपी जबलपुर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए।

13 जनवरी को लोकायुक्त एसपी अंजुलता पटले कोर्ट के समक्ष पेश हुईं और बताया कि इस मामले के विवेचना अधिकारी डीएसपी ऑस्कर किंडो थे, जो वर्तमान में रिटायर्ड हो चुके हैं। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार करते हुए माना कि फाइल उनके स्तर पर गुम हो गई।

तुरंत एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

लोकायुक्त एसपी के बयान के बाद कोर्ट ने निर्देश दिए कि तत्काल विवेचना अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। साथ ही तीन दिन के भीतर रजिस्ट्रार जनरल के माध्यम से रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि दोषी अधिकारी ऑस्कर किंडो के रिटायर्ड हुए अभी चार साल पूरे नहीं हुए हैं, इसलिए कार्रवाई संभव है।

हाईकोर्ट ने माना कि लोकायुक्त विभाग की यह गंभीर लापरवाही है। यदि फाइल गुम हुई थी, तो तत्काल विवेचना अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी, लेकिन लोकायुक्त अधिकारियों ने लापरवाही बरती। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही यह सामने आया कि डीएसपी रैंक के अधिकारी द्वारा फाइल गुम की गई।

ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगा केस

अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने बताया कि लोकायुक्त कार्यालय से मूल फाइल गुम होने को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिस पर अब स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि भ्रष्टाचार से जुड़ा यह मामला ट्रायल कोर्ट में चलता रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तय समय सीमा में दोषी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो अवमानना याचिका दायर की जाएगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि फाइल गुम होने के संबंध में एफआईआर और जांच के आदेश प्रभावी रहेंगे। अधिवक्ता जसनीत सिंह होरा ने कहा कि हाईकोर्ट का यह आदेश आने वाले मामलों और सरकारी विभागों के लिए नजीर बनेगा। इससे मूल दस्तावेजों में लापरवाही या छेड़छाड़ करने वाले अधिकारियों पर निश्चित रूप से अंकुश लगेगा।



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