सर्दी में मटर की पत्तियां हो रही पीली, समय पर करें पहचान, जानें बचाव के उपाय

सर्दी में मटर की पत्तियां हो रही पीली, समय पर करें पहचान, जानें बचाव के उपाय


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How to protect pea plants from frost: ठंड के मौसम में मटर की फसल में पत्तियों का पीला पड़ना, पत्तों की ऊपरी सतह पर सफेद पाउडर जमना, फली में छेद दिखाई देना और पौधों की बढ़वार रुक जाना आम लक्षण है. यदि शुरुआती दौर में ही इन संकेतों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. रोग नियंत्रण के लिए सबसे पहले फसल की नियमित निगरानी जरूरी है.

मध्यप्रदेश में इस समय कड़ाके की सर्दी पड़ रही है. विंध्य क्षेत्र में भी ठंड का सितम इतना है कि लोगों का बुरा हाल है. सर्दी का असर पेड़-पौधों और फसलों पर भी दिखाई दे रहा है. खासकर हरी मटर की फसल इस मौसम में कई तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे है. मटर किसानों के लिए एक लाभकारी नकदी फसल है. जिसका बाजार भाव अच्छा रहता है. लेकिन रोग लगने की स्थिति में पूरी फसल बर्बाद होने का खतरा बना रहता है. ऐसे में समय पर रोगों की पहचान और उचित प्रबंधन बेहद जरूरी हो जाता है.

ठंड के मौसम में मटर की फसल में पत्तियों का पीला पड़ना, पत्तों की ऊपरी सतह पर सफेद पाउडर जमना, फली में छेद दिखाई देना और पौधों की बढ़वार रुक जाना आम लक्षण है. यदि शुरुआती दौर में ही इन संकेतों पर ध्यान नहीं दिया गया तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है. रोग नियंत्रण के लिए सबसे पहले फसल की नियमित निगरानी जरूरी है. संतुलित मात्रा में खाद का प्रयोग, समय पर सिंचाई और खेत की साफ-सफाई से मटर की फसल को काफी हद तक रोगों से बचाया जा सकता है. ठंड के मौसम में मटर की फसल को कम पानी की आवश्यकता होती है. इसलिए खेत में जलभराव की स्थिति से बचना बेहद जरूरी है. अधिक नमी रहने पर फफूंदजनित रोग तेजी से फैलते है.

किसान सलाहकार कृष्णकांत तिवारी ने लोकल 18 को बताया कि ठंड के मौसम में मटर में सबसे अधिक चूर्णी फफूंद (पाउडरी मिल्ड्यू) रोग देखने को मिलता है. इसके लक्षण पत्तियों की ऊपरी सतह पर सफेद चूर्ण जैसा पाउडर दिखाई देना है. जिससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है और उपज में भारी कमी आ जाती है. इसके नियंत्रण के लिए किसान 0.2 प्रतिशत सल्फर का छिड़काव कर सकते है. इसके अलावा पेनकोनाजोल 10 प्रतिशत का उपयोग 200 मिलीलीटर प्रति एकड़ या 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से प्रभावी माना गया है.

कृष्णकांत तिवारी ने बताया कि 15 से 28 डिग्री सेल्सियस तापमान नम वातावरण और शुष्क हवा चूर्णी फफूंद के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाती है. इसके अलावा मटर में डाउनी मिल्ड्यू (मृदु रोमिल आसिता) रोग भी देखने को मिलता है. जिसमें पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले धब्बे और निचली सतह पर धूसर रंग की फफूंद दिखाई देती है. इसके नियंत्रण के लिए मेटालेक्सिल 8 प्रतिशत + मैनकोजेब 64 प्रतिशत का मिश्रण 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है. वहीं, कभी-कभी रस्ट (गिरवा) रोग का प्रकोप भी होता है. जिसे उपयुक्त कवकनाशियों के छिड़काव से नियंत्रित किया जा सकता है. कृष्णकांत तिवारी ने बताया कि मटर में एस्कोकाइट ब्लाइट एक गंभीर रोग है. जिसके प्रभावी नियंत्रण के लिए एजोक्सीस्ट्रोबिन 18.5 प्रतिशत का 1 से 1.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव लाभकारी रहता है.

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