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Khargone Public Opinion: कागजों में 9 लाख 90 हजार रुपए की धातु या पत्थर की प्रतिमा दर्शाई गई, जबकि मौके पर करीब 50 हजार रुपए कीमत की फाइबर की प्रतिमा लगा दी गई. मामला उजागर होते ही प्रशासन की किरकिरी होने लगी. इसके बाद कलेक्टर भव्या मित्तल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रतिमा बदलने और दोषी ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
Khargone Public Opinion: मध्य प्रदेश के खरगोन में इन दिनों जननायक क्रांति सूर्य टंट्या भील की प्रतिमा को लेकर जबरदस्त विवाद खड़ा हो गया है. शहर के बिस्टान नाका तिराहा पर स्थापित की गई प्रतिमा ने भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं. करीब 10 लाख रुपए की लागत से पत्थर या धातु की प्रतिमा लगाई जानी थी, लेकिन आरोप है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से फाइबर की प्रतिमा लगा दी. हैरानी की बात यह है कि प्रतिमा का लोकार्पण क्षेत्रीय विधायक बालकृष्ण पाटीदार और कलेक्टर भव्या मित्तल द्वारा किया जा चुका था. बाद में जब यह जानकारी सामने आई कि प्रतिमा धातु या पत्थर की नहीं बल्कि फाइबर की है, तो प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. इसके बाद यह मामला राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ने लगा.
जानकारी के अनुसार 24 सितंबर 2025 में नगरपालिका परिषद ने करीब 40 लाख रुपए के सौंदर्यीकरण कार्य को स्वीकृति दी थी, जिसमें टंट्या मामा की प्रतिमा स्थापना भी शामिल थी. इसके तहत 9 लाख 90 हजार रुपए में धातु की प्रतिमा क्रय करने का टेंडर जारी हुआ. 15 नवंबर 2025 को प्रतिमा स्थापित कर अतिथियों द्वारा लोकार्पण कर दिया गया. लेकिन कांग्रेस की शिकायत और लोगों के विरोध के बाद हुई जांच में खुलासा हुआ.
ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया
कागजों में 9 लाख 90 हजार रुपए की धातु या पत्थर की प्रतिमा दर्शाई गई, जबकि मौके पर करीब 50 हजार रुपए कीमत की फाइबर की प्रतिमा लगा दी गई. मामला उजागर होते ही प्रशासन की किरकिरी होने लगी. इसके बाद कलेक्टर भव्या मित्तल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रतिमा बदलने और दोषी ठेकेदार व संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. नगरपालिका परिषद ने ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर दिया है और यह निर्णय लिया गया है कि दोबारा धातु की प्रतिमा स्थापित की जाएगी.
सख्त कार्रवाई की मांग
भ्रष्टाचार सामने आने के बाद खरगोन के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है. राजेश रंधावा ने कहा कि यह बेहद गलत है और इस तरह का कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. टंट्या मामा हमारे आदर्श हैं और हम उन्हें भगवान मानते हैं. दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए.
यह सम्मान की लड़ाई है
पप्पू मोये ने कहा कि टंट्या मामा देश के महापुरुष हैं, उनका अपमान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है. जब पैसा धातु की मूर्ति के लिए स्वीकृत है, तो धातु की ही प्रतिमा लगनी चाहिए. दयाराम दफल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि धातु या पत्थर की प्रतिमा नहीं लगी तो आंदोलन किया जाएगा. केवल ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना काफी नहीं, अधिकारियों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए.
प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
दुर्गेश राजदीप ने कहा कि किसी भी महापुरुष की प्रतिमा लगना गौरव का विषय होता है. टंट्या मामा हमारे लिए पूजनीय हैं और उन्होंने क्षेत्र में क्रांति का बिगुल बजाया था. ऐसे संवेदनशील मामले में भ्रष्टाचार होना बेहद दुखद है और यह सोचने पर मजबूर करता है कि जिला प्रशासन और नगरपालिका से इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई. श्याम मेवाडे ने कहा कि आम विकास कार्यों में भ्रष्टाचार की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन जब बात देश के महापुरुषों की प्रतिमाओं की हो, तो इस तरह का कृत्य अक्षम्य है. ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी टंट्या मामा जैसे जननायकों के सम्मान से खिलवाड़ न कर सके.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें