इंजेक्शन नहीं, टॉनिक नहीं… बस ये एक देसी जड़! और गाय देने लगी बाल्टी भर-भर दूध!

इंजेक्शन नहीं, टॉनिक नहीं… बस ये एक देसी जड़! और गाय देने लगी बाल्टी भर-भर दूध!


शिवांक द्विविद, सतना: ग्रामीण इलाकों में पशुपालन आज भी लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य साधन है लेकिन जब गाय अचानक दूध देना कम या बंद कर दे तो पशुपालक की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. महंगे इंजेक्शन, केमिकल दवाइयों और बाजारू टॉनिक पर पैसा खर्च करने के बावजूद कई बार कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता. ऐसे में देसी और आयुर्वेदिक ज्ञान एक बार फिर उम्मीद बनकर सामने आ रहा है. पुराने जमाने से इस्तेमाल की जा रही शतावरी की जड़ को आज वैज्ञानिक भी गंभीरता से देख रहे हैं. यह जड़ न केवल दूध की मात्रा बढ़ाने में मदद करती है बल्कि गाय के मानसिक तनाव को कम कर लैक्टेशन प्रक्रिया को दोबारा सक्रिय करने में अहम भूमिका निभाती है.

दूध कम होने की असली वजह क्या है?
जिला पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सक डॉ. बृहस्पति भारती लोकल 18 से बताते हैं कि कई बार गाय शारीरिक रूप से स्वस्थ होने के बावजूद दूध नहीं देती. इसकी सबसे बड़ी वजह मानसिक तनाव भी हो सकता है. जब पशु तनाव में होता है तो उसके दिमाग से ऑक्सीटॉसिन हार्मोन का स्राव सही तरीके से नहीं हो पाता. ऑक्सीटॉसिन ही वह हार्मोन है जो मिल्क लेट डाउन यानी दूध निकलने की प्रक्रिया को शुरू करता है. यदि यह हार्मोन रिलीज न हो तो गाय के थनों में दूध होते हुए भी वह बाहर नहीं आ पाता.

शतावरी की जड़ कैसे करती है काम?

आयुर्वेद में शतावरी को बलवर्धक और लैक्टेशन बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी माना गया है. शतावरी की जड़ में मौजूद प्राकृतिक तत्व गाय के हार्मोनल सिस्टम को संतुलित करते हैं और दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करते हैं. इसका सीधा असर ऑक्सीटॉसिन हार्मोन पर पड़ता है जिससे दूध निकलने की प्रक्रिया दोबारा सक्रिय हो जाती है. यही वजह है कि पुराने समय में पशुपालक शतावरी की जड़ या उसका काढ़ा गाय को खिलाते थे और अच्छे नतीजे देखते थे.

सही मात्रा और सही तरीका है जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार शतावरी की जड़ का सही उपयोग बेहद जरूरी है. आमतौर पर 25 से 50 ग्राम शतावरी की जड़ का चूर्ण गुड़ या दाने में मिलाकर गाय को दिया जा सकता है. यदि ताजी जड़ उपलब्ध हो तो इसकी 2 से 3 डंठल पीसकर पशु को खिलाई जा सकती हैं. कुछ किसान इसका काढ़ा बनाकर भी उपयोग करते हैं. नियमित और संतुलित मात्रा में देने से दूध की मात्रा बढ़ने के साथ-साथ फैट और प्रोटीन की गुणवत्ता में भी सुधार देखा जाता है.

बाजार की दवाओं में भी छिपा है यही देसी राज

आजकल बाजार में मिलने वाली दूध बढ़ाने वाली कई टैबलेट्स और टॉनिक में भी शतावरी जैसे आयुर्वेदिक तत्व मिलाए जाते हैं. डॉ. बृहस्पति भारती बताते हैं कि ये टैबलेट्स आमतौर पर दूध दुहने से एक से डेढ़ घंटे पहले दी जाती हैं और इनके कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं होते. यानी आधुनिक दवाओं की जड़ भी कहीं न कहीं इसी देसी ज्ञान से जुड़ी हुई है.

सेहत, प्रजनन और रोग प्रतिरोधक क्षमता में भी फायदा

शतावरी का फायदा सिर्फ दूध बढ़ाने तक सीमित नहीं है. इसके नियमित सेवन से गाय की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है पाचन बेहतर रहता है और प्रजनन क्षमता में भी सुधार देखा जाता है. यही कारण है कि विशेषज्ञ इसे एक संपूर्ण देसी समाधान मानते हैं. सही जानकारी और सलाह के साथ इसका इस्तेमाल किया जाए तो शतावरी की जड़ पशुपालकों के लिए किसी वरदान से कम नहीं.



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