उज्जैन में लगातार दूसरे वर्ष आयोजित हुए व्यापार मेले का सीधा असर बीते साल इंदौर परिवहन कार्यालय के राजस्व पर पड़ा है। व्यापार मेले में दी गई छूट के चलते इंदौर जिले में पंजीकृत होने वाले कई वाहन उज्जैन में पंजीकृत हो गए, जिससे वर्ष 2025 में इंदौर आरटीओ के राजस्व और वाहन बिक्री दोनों में गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि वाहन बिक्री का अंतर ज्यादा नहीं है, लेकिन राजस्व में करीब 77 करोड़ का अंतर आया है। परिवहन विभाग द्वारा तैयार वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष- 2025 में इंदौर में 1 लाख 98 हजार 530 वाहनों का पंजीयन हुआ, जिससे करीबन 805 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ, वहीं वर्ष-2024 में 1 लाख 99 हजार 82 वाहन पंजीकृत हुए थे और इससे 883 करोड़ रुपए का राजस्व मिला था। इस तरह एक साल में 552 वाहन कम पंजीकृत हुए, जबकि राजस्व में 77 करोड़ रुपए की गिरावट दर्ज की गई। उज्जैन मेले में पंजीयन शुल्क पर मिलती है 50 प्रतिशत की छूट- दो साल से प्रदेश सरकार उज्जैन में विक्रमोत्सव व्यापार मेले का आयोजन करती है, जिसमें वहां पर पंजीकृत होने वाले वाहनों पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट मिल जाती है। ऐसे में महंगी कारें जिन पर लाखों रुपए की पंजीयन राशि लगती है, वो बच जाती है। इंदौर के कई महंगी कारों के डीलर, जिसमें ऑडी, मर्सडीज, रैंज रोवर सहित अन्य कारों के डीलर वहां पर वाहनों की बिक्री करते हैं, जिससे राजस्व का बड़ा नुकसान हो जाता है। इंदौर परिवहन कार्यालय को हुआ नुकसान
परिवहन अधिकारियों के अनुसार राजस्व में आई इस गिरावट का मुख्य कारण उज्जैन व्यापार मेले को माना जा रहा है। मेले में विशेष छूट और सुविधाओं के चलते 20 लाख रुपए से अधिक कीमत वाले कई महंगे वाहन उज्जैन में पंजीकृत हुए। इसका सीधा नुकसान इंदौर परिवहन कार्यालय को उठाना पड़ा। प्रदेश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार माने जाने वाले इंदौर में राजस्व घटने को लेकर विभागीय स्तर पर भी चिता जताई जा रही है। उज्जैन में व्यापार मेला शुरू होने से पहले इंदौर परिवहन कार्यालय का प्रदर्शन लगातार बेहतर हो रहा था।
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