सतना. शहर एक बार फिर पेयजल व्यवस्था की बदहाली और लापरवाह निर्माण कार्यों के कारण सुर्खियों में है. करोड़ों रुपये खर्च कर बिछाई गई नई फीडर लाइन ट्रॉयल के दौरान ही फट गई और एक घंटे के भीतर डेढ़ लाख लीटर से अधिक पीने का पानी सड़कों पर बह गया. यह वही फीडर लाइन है, जिस पर नगर निगम ने करीब 2.48 करोड़ रुपये खर्च किए हैं और जिसे शहर के चार वार्डों की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से बिछाया गया था. ट्रॉयल के नाम पर बार-बार होने वाली इस तकनीकी नाकामी ने न सिर्फ सिस्टम पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी दिखा दिया है कि सतना में विकास योजनाएं कितनी खोखली जमीन पर खड़ी हैं.
कहां और कैसे फटी फीडर लाइन
रविवार दोपहर करीब दो बजे सिटी कोतवाली चौक के पास नई फीडर लाइन अचानक तेज प्रेशर के साथ फट गई. लाइन फटते ही पानी का तेज फव्वारा उठा और कुछ ही मिनटों में आसपास की सड़कें जलमग्न हो गईं. दुकानों और मकानों में पानी घुस गया. हालात इतने बिगड़ गए कि करीब 200 मीटर के दायरे में आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया.
एक घंटे में डेढ़ लाख लीटर पानी बर्बाद
क्षतिग्रस्त फीडर लाइन से बहने वाले पानी की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पानी 30 से 35 फीट ऊंचाई तक उछलता रहा. दो से तीन मंजिला इमारतों तक पानी भर गया. अनुमान है कि करीब एक घंटे में लगभग 1.5 लाख लीटर पीने का पानी बर्बाद हो गया.
नजीराबाद टंकी और फीडर लाइन का पूरा मामला
नजीराबाद क्षेत्र में जलावर्धन योजना के तहत 13.64 लाख लीटर क्षमता की उच्च स्तरीय टंकी का निर्माण नगर निगम ने करीब पांच वर्ष पहले कराया था. योजना यह थी कि इस टंकी से वार्ड 35, 36, 38 और 39 में नियमित पेयजल आपूर्ति की जाएगी. लेकिन टंकी को भरने के लिए फीडर लाइन ही नहीं थी.
ठेका, देरी और गुणवत्ता पर सवाल
नगर निगम ने कंपनी बाग स्थित टंकी से नजीराबाद टंकी तक करीब दो किलोमीटर लंबी फीडर लाइन बिछाने का ठेका तीन साल पहले 2.48 करोड़ रुपये में दिया. कार्य अवधि 18 माह तय थी. लेकिन ठेकेदार ने पेटी में काम आगे दे दिया. नतीजा यह हुआ कि कार्य एक साल छह माह की देरी से पूरा हुआ.
ट्रॉयल में बार-बार फेल हो रही लाइन
पिछले एक साल में जब भी नगर निगम ने इस फीडर लाइन से ट्रॉयल के तौर पर पानी सप्लाई शुरू की, तब-तब कहीं न कहीं पाइप लाइन फट गई. बीते दस दिनों में यह दूसरी बड़ी घटना है. इससे पहले 8 जनवरी को भी यही लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी.
8 जनवरी के बाद क्या हुआ . बुलेट पॉइंट में
- 8 जनवरी को फीडर लाइन फटी
- नगर निगम ने अपने संसाधनों से मरम्मत करवाई
- ठेकेदार पर कोई कार्रवाई नहीं हुई
- 17 जनवरी तक पेयजल आपूर्ति बंद रही
- लोग हैंडपंप और पुराने ट्यूबवेल पर निर्भर रहे