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सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मूल शिवलिंग के रहस्यमयी अवशेषों के दर्शन का दुर्लभ अवसर मिल.। कहा जाता है कि 1000 साल पहले महमूद गजनी के आक्रमण में ध्वस्त किया गया यह शिवलिंग धरती को छूता नहीं था. इसके टुकड़ों में आज भी चुंबकीय गुण पाए जाते हैं, जिन्हें वैज्ञानिक पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं.
सागर. 1000 साल पहले महमूद गजनी ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के मंदिर पर आक्रमण कर जिस शिवलिंग को ध्वस्त कर दिया था, उसी मूल शिवलिंग के विग्रह सागर पहुंचे. करीब 4 घंटे तक इनके दिव्य दर्शन करने का सौभाग्य भी मिला. कहा जाता है कि सोमनाथ में जो मूल शिवलिंग था वह इतना ऊर्जा युक्त और विशेष था कि वह हवा में लटका हुआ था, यानी यह भूमि को स्पर्श नहीं कर रहा था.
आज भी जब इन अवशेष को एक के ऊपर एक किया जाता है तो यह चुंबकीय गुणों की वजह से पास नहीं आ पाते हैं. जहां पर भी यह रहस्यमई टुकड़े पहुंच रहे हैं वहां उनकी दर्शनों के लिए हजारों लोगों की भीड़ लग जाती है, जिस शहर में प्रवेश करते हैं वहां पर पहले रुद्र अभिषेक किया जाता है.पूजन अर्चन होता है इसके बाद यह दर्शन करने के लिए रख देते हैं. इतना ही नहीं इन अवशेष की जांच कराने इनकी सत्यता जांचने में भू वैज्ञानिकों ने पाया कि यह टुकड़े ऐसी सामग्री से बने हैं जो पृथ्वी पर नहीं है, और यह भी नहीं बता पा रहे हैं कि इन अवशेष में चुंबकीय गुण क्यों हैं. किसीकी वजह से अब यह रहस्य बने हुए हैं.
100 साल से गुप्त पूजा
सागर में आर्ट ऑफ़ लिविंग के संकल्प मलैया ने बताया कि जो 12 ज्योतिर्लिंग हैं उनमें पहला ज्योतिर्लिंग सोमनाथ के शिवलिंग को माना जाता है, क्योंकि इसकी स्थापना स्वयं भगवान चंद्र देव ने की थी और इसमें इस तरह के गुण थे कि वह भूमि को स्पर्श नहीं करता था. 1025 शताब्दी में महमूद गजनी ने आक्रमण करके शिवलिंग को नष्ट कर दिया था. उस समय जो मंदिर के महंत अग्निहोत्री ब्राह्मण परिवार इनके अवशेष को अपने साथ ले गया था और वह पूजा करता रहा. पिछले 100 साल से उनकी गुप्त पूजा की जा रही थी.
सीताराम शास्त्री के द्वारा यह शिवलिंग के अवशेष कुछ समय पहले रवि शंकर महाराज को जिसकी सत्यता के लिए उन्होंने टेस्ट करवाएं और अब पूरे भारत में दर्शन करने के लिए यात्रा के रूप में निकाला जा रहा है. मध्य प्रदेश में सबसे पहले उज्जैन, फिर ओंकारेश्वर में यह शिवलिंग पहुंचे थे. जहां महाकाल और ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से इनका मिलन हुआ. इसके बाद यह जबलपुर, होशंगाबाद, होते हुए सागर आए.
टुकड़े किसी खास चीज से बने
कहा जाता है कि जब 2007 में वैज्ञानिकों ने इन टुकड़ों की सामग्री संरचना का अध्ययन किया, तो पाया कि इसके केंद्र में एक मजबूत चुंबकीय क्षेत्र है, जो बहुत ही असामान्य है. वैज्ञानिकों ने कहा कि उस स्थिति में लटके रहने के लिए यह एक बहुत ही विशेष और दुर्लभ प्रकार का चुंबकीय पत्थर होना चाहिए. ऐसे चुंबकीय गुणों वाला पत्थर बहुत दुर्लभ है. हालांकि इसकी संरचना क्रिस्टलीय प्रतीत होती है, लेकिन यह किसी भी ज्ञात पदार्थ से मेल नहीं खाती है, जिससे पता चलता है कि टुकड़े किसी नयी या दुर्लभ चीज से बने थे.
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Dallu Slathia is a seasoned digital journalist with over 7 years of experience, currently leading editorial efforts across Madhya Pradesh and Chhattisgarh. She specializes in crafting compelling stories across …और पढ़ें