Pan ki kheti : छतरपुर जिले के गढ़ीमलहरा निवासी भगवान दास चौरसिया पिछले 40 वर्षों से पान की खेती कर रहे हैं. बढ़ती लागत और महंगी रासायनिक खाद से परेशान होकर उन्होंने देसी “मटका खाद” का तरीका अपनाया. सरसों और तिल की खली से तैयार यह खाद सस्ती होने के साथ ज्यादा असरदार भी साबित हो रही है. किसान एक बड़े मटके में 6–7 पसेरी खली और पानी डालकर 6–7 दिन सड़ने देते हैं. करीब 7 दिन में खाद तैयार हो जाती है. इससे पान की बेल तेजी से बढ़ती है, लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है.