आज खंडहर बन चुकी हैं ये इंदौर की ऐतिहासिक इमारतें, कभी थीं MP की शान और लोगों की चहल पहल का केंद्र

आज खंडहर बन चुकी हैं ये इंदौर की ऐतिहासिक इमारतें, कभी थीं MP की शान और लोगों की चहल पहल का केंद्र


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Indore Historical Buildings : इंदौर की कई ऐतिहासिक इमारतें अब पूरी तरह खंडहर बन चुकी हैं, लेकिन इनकी कहानी आज भी मध्य प्रदेश की गौरवशाली विरासत को याद दिलाती है. कभी ये महल और हवेलियां लोगों की चहल पहल और सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे. उनकी स्थापत्य कला, भव्यता और ऐतिहासिक महत्व शहर की शान थी. आज ये इमारतें सिर्फ खंडहर में बदल गई हैं, लेकिन इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों के लिए यह इंदौर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रमाण बनी हुई हैं.

आज इंदौर हर तरफ चकाचौंध और दौड़भाग से भरा है. पर इस चमक-दमक के नीचे, कुछ ऐसी जगहें भी हैं. जो वक्त की धूल में दबकर अपनी पहचान खो चुकी हैं और पूरी तरह से खंडहर बन चुकी हैं. यहां कोई आता जाता भी नहीं लेकिन एक समय ये लोगों की चहल पहल ये रौशन थे. यहां आज आपको सन्नाटा और अजीब सी खामोशी दिखाई देती है.

rajkumar mill indore

जूनी इंदौर में बसा राजकुमार मिल आज पूरी तरह से वीरान और जंगल बन चुका है, लेकिन कभी इसके सामने खड़े होने पर मशीनों की आवाज कपड़े की खुशबू और मजदूर दिखाई देते थे. राजकुमार बिल का सायरन बड़ा फेमस था. जिससे लोगों को समय का पता चल जाता था. आज यहां जंग जग लगे पुराने औजार मिल की चिमनी और भूतिया मंजर दिखता है.

rigal talkies

रीगल टॉकीज एक समय में सीनेमा के शौकीनों का अड्डा था. जब मनोरंजन की कोई साधन नहीं थे. तब केवल रीगल टॉकीज ही इंदौर में कैसी जगह थी. जहां लोगल मनोरंजन के लिए आया करते थे. यहां फिल्में कई महीने तक लगी रहती थी और हाउसफुल ही चलता था, लेकिन अब यह टॉकीज़ बंद हो चुका है. रीगल चौराहे पर मौजूद यह इमारत अब खंडहर बन चुकी है.

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indore manikbagh

माणिक बाग पैलेस कभी सबसे सुंदर महलों में से एक हुआ करता था लेकिन इसके पिछले हिस्से अब पूरी तरह से खंडहर बन चुके हैं. राजा यशवंतराव होलकर ने इसे दुनिया के सबसे खूबसूरत महलों में से एक बनाने का सपना देखा था पर आज, महल की शानो-शौकत के पीछे, ये टूटी दीवारें, गिरे हुए छज्जे और उजड़े हुए कमरे ही दिखाई देते हैं. आज‌‌ यह पूरी तरह बेजान हो चुका है.

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इंदौर से करीब 20 किमी दूर है कजलीगढ़. यहां करीब 200 साल पहले महाराज शिवाजीराव होलकर ने किले का निर्माण कराया था. वे इसे शिकारगाह के तौर पर इस्तेमाल करते थे. शिकारगाह के अलावा इस किले का इस्तेमाल सामरिक एवं सुरक्षा की दृष्टि से पिंडारियों को रखने के लिए भी किया जाता था. पर आज‌‌ यह पूरी तरह खंडहर बन चुका है जहां केवल दीवारें है यहां कोई आता जाता भी नहीं.

indore mill

कभी मध्य प्रदेश की शान और सबसे बड़ी मिल में से एक हुकुमचंद मिल भी आज खंडहर का रुप ले चुकी है. एक समय यहां 6,000 से ज्यादा मजदूर तीन शिफ्टों में काम करते थे. जब मजदूर छूटते तो सड़कों पर साइकिल का सैलाब आ जाता था. 1991 में जब मिल बंद हुई, तो उसके बाद ये ही यह जीर्ण शीर्ण होना शुरु हो गया अंदर की करोड़ों की मशीनें जंग खाकर मिट्टी में मिल चुकी हैं, पूरा परिसर अब जंगल बन चुका है.

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देखें इंदौर की वो इमारतें, जो कभी चमकती थीं और अब खंडहर में बदल गईं



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