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Animal Care Tips: पशुओं में बीमारी तो अनेक होती हैं लेकिन आज हम एक ऐसी बीमारी बताने जा रहे हैं जिसमें पशु चलते-फिरते बेहोश हो जाता है. इस बीमारी को सर्रा या भौंरा भी कहा जाता है. ये बीमारी बकरी, गाय और भैंस जैसे पशुओं में देखी जाती है. इस बीमारी का अभी तक टीका भी नहीं बना है. इस बीमारी के लक्षण क्या है? आइए जानते हैं एक्सपर्ट से.
Animal Husbandry: मौसम में बदलाव से इंसानों के साथ ही पशु पक्षियों की भी सेहत बिगड़ने लगती है. छतरपुर में इन दिनों पशुओं में बीमारियां फैलने का सिलसिला बढ़ता जा रहा है. दरअसल, इस बीमारी में पशु चलते-फिरते अचानक गिर जाते हैं. हालांकि, इन्हें होश में लाया जाता है उठाया जाता है. लेकिन इसके बाद अगले दिन फिर यही हाल होता है. साथ ही बुखार, कमजोरी, सुस्ती, वजन कम होना और खून की कमी हो जाती है. इस बीमारी के चलते पशुओं में तेज बुखार, थरथराहट और आंख से दिखाई न देने का लक्षण दिखने लगता है.
ये हैं सर्रा रोग के लक्षण
डॉ मातादीन बताते हैं कि किसान भाई अगर समय से इस रोग को पहचान लेते हैं तो वह अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय में दिखाएं. इसके अलावा हर गांव में मैत्री गौ सेवक भी होते हैं वहां भी आप अपने पशु को दिखा सकते हैं. अगर पशुपालकों के यहां इसकी व्यवस्था भी नहीं है तो भी पशुपालक खुद से ही इसका उपचार कर सकते हैं. जैसे अगर पशु बेहोश हो गया है तो उसके सिर में ठंडा पानी डाल सकते हैं. साथ ही कॉम्बिफ्लेम की 1 या 2 गोली खिला सकते हैं जिससे तेज बुखार उतर जाता है. पशु की उम्र के अनुसार गोली खिला सकते हैं.
घरेलू उपचार भी कर सकते हैं
डॉक्टर मातादीन बताते हैं कि इस बीमारी में पशुओं का एनर्जी लेवल कम हो जाता है यानी उनका ग्लूकोज कम हो जाता है तो ऐसे में आप गुड़ का पानी भी पिला सकते हैं. जिससे यह ग्लूकोज की तरह काम करता है. पशु में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, उनके शरीर में एनर्जी आ जाती है. जिससे वह ठीक हो जाते हैं.
इस बैक्टीरिया से होता है रोग
डॉक्टर बताते हैं कि ट्रिपैनोसोमियासिस बैक्टीरिया के कारण यह रोग हो जाता है. ट्रिपैनोसोमियासिस (Trypanosomiasis) स्लीपिंग सिकनेस (sleeping sickness) बीमारी, मक्खियों से फैलती हैं. इसे ट्रिप रोग भी कहते हैं. इसके उपचार की बात करें तो इसमें इंजेक्शन और टैबलेट दे सकते हैं. पशुओं में सर्रा रोग किसी भी महीने में हो सकता है. ये 12 महीने वाली बीमारी है. यह कोई सीजनल बीमारी नहीं है.
ऐसे करते हैं उपचार
डॉक्टर मातादीन बताते हैं सर्रा रोग से पीड़ित पशुओं को कि बेरेनिल इंजेक्शन का डोज दे दिया जाता है. इसे एक बार ही लगाना होता है. हालांकि उम्र के अनुसार देते हैं. एक बार के डोज से ही ठीक हो जाता है. साथ ही न्यूरोक्सीन इंजेक्शन (Neuroxin Injection) का डोज भी दे सकते हैं. एविल (इंजेक्शन और टैबलेट दोनों उपलब्ध हैं) और बेलामिल इंजेक्शन का डोज दे सकते हैं. पेरासिटामोल टैबलेट भी खिला सकते हैं.
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विभांशु द्विवेदी मूल रूप से मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के रहने वाले हैं. पत्रकारिता में 5 साल का अनुभव है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय रायपुर से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है. पॉलिटिक…और पढ़ें
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