भारतीय कृषि में पशुओं का महत्वपूर्ण स्थान है. पारंपरिक रूप से पशु हमेशा से ही खेती में योगदान देते आए है. चाहे वह खेती से जुड़े कार्य हों या दूध उत्पादन. पशु कृषि का आधार बने हुए है. पिछले कुछ वर्षों में पशुपालन एक व्यावसायिक रूप में तेजी से उभरा है. लेकिन कभी-कभी पशुओं को कुछ हो जाने पर किसान परेशान हो जाते है. चाहे वह किसी हादसे में घायल हो जाएं या उनकी मृत्यु हो जाए. ऐसे समय में न केवल भावनात्मक बल्कि आर्थिक नुकसान भी होता है. परंतु इस नुकसान की भरपाई मुमकिन है.
दरअसल, जिस प्रकार इंसानों का बीमा होता है. उसी तरह पशुओं का भी बीमा होता है. मगर यह तभी एक्टिवेट होगा जब आप चाहेंगे. इस संबंध में लोकल 18 जिला पशु चिकित्सालय के पशुपालन परियोजना अधिकारी डॉक्टर घनश्याम परते से बातचीत की गई और पशुओं के बीमा को लेकर उनकी योजना को समझने की कोशिश की गई.
पशुपालन परियोजना अधिकारी डॉक्टर घनश्याम परते ने बताया कि जिस प्रकार नागरिकों का एक पहचान के लिए कार्ड होता है. वैसे ही पशुओं के कान में एक कार्ड अटैच होता है. जिसमें 16 अंक होते है. इसी से पशु की पहचान होती है और इसी के आधार पर बीमा कंपनी विभाग से संपर्क करती है और पशुओं का बीमा किया जाता है. इस प्रक्रिया में पशु चिकित्सक और ग्रामीण स्तर के गौसेवक शामिल होते है.
अब जानें किन पशुओं का बीमा होता है
हर प्रकार के पालतू पशुओं का बीमा नहीं करवाया जा सकता. दुधारू गाय-भैंस (देशी और संकर), खेत में काम करने वाले बैल और नर भैंस, भेड़, बकरी, सुअर, घोड़ा, गधा, ऊंट और खरगोश का बीमा करवाया जा सकता है.
अगर किसान अपने पशु का बीमा करवाना चाहते है तो वे नजदीकी पशु चिकित्सालय जाकर अपने पशु का बीमा करवा सकते है. इसके अलावा एनिमल हेल्पलाइन नंबर 1962 पर संपर्क कर बीमा की जानकारी प्राप्त कर सकते है.
बीमा के लिए प्रीमियम भरना होता है
अगर किसान अपने पशु का बीमा करवाते है तो उन्हें इसके लिए प्रीमियम भरना पड़ता है. हर कंपनी का अपना अलग प्लान होता है. जिसमें पशु की उत्पादकता के आधार पर बीमा और प्रीमियम तय होता है. शासन भी प्रीमियम की राशि में सब्सिडी प्रदान करता है. डॉक्टर परते के मुताबिक, शासन प्रीमियम का 75 प्रतिशत हिस्सा देता है, जबकि पशुपालक को 25 प्रतिशत हिस्सा अपनी जेब से देना होता है.
बीमा कब और कितना मिलता है?
आम तौर पर बीमा करवाए गए पशु की मौत बीमारी, प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़, भूकंप और सूखा के कारण होती है या किसी दुर्घटना जैसे करंट लगने या वाहन की चपेट में आने से होती है. सर्जरी के कारण भी पशु की मौत हो सकती है. इन सभी स्थितियों में पशु मालिक को बीमा राशि मिलती है. इसमें एक प्रक्रिया होती है. जिसमें पशु का पोस्टमार्टम किया जाता है और मौत का कारण स्पष्ट होता है. तब बीमा की राशि मिलती है. बीमा कवर पशु की बाजार कीमत के बराबर ही होता है.