बालाघाट में सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी महासंघ ने बुधवार को अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया। प्रदेश संगठन के आह्वान पर पेंशनर्स ने मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी नाराजगी जाहिर की। महासंघ ने साफ कहा कि सरकार उनकी जायज मांगों को लगातार अनदेखा कर रही है, जिससे बुजुर्ग पेंशनर्स को आर्थिक और मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। महासंघ की सबसे प्रमुख मांग छठे वेतनमान के 32 महीने के एरियर का भुगतान है। जिलाध्यक्ष के.जी. बिसेन ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश और कैबिनेट के फैसले के बावजूद अब तक यह राशि नहीं मिली है, जो सीधे तौर पर आदेशों की अवहेलना है। इसके अलावा, पेंशनर्स ने मध्य प्रदेश राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 46(6)ए को हटाने की मांग की है। उनका कहना है कि छत्तीसगढ़ बने दशक बीत गए, लेकिन आज भी पेंशन संबंधी कामों के लिए छत्तीसगढ़ की सहमति लेनी पड़ती है, जिससे पेंशनर्स का नुकसान हो रहा है। महंगाई भत्ता और आयु सीमा में छूट की मांग पेंशनर्स ने केंद्र सरकार की तर्ज पर स्वीकृति की तारीख से ही महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) देने की मांग की है। साथ ही, वर्तमान में 80 वर्ष की उम्र के बाद मिलने वाली 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन की सुविधा को 65 वर्ष की आयु से ही लागू करने का आग्रह किया है, ताकि अधिक से अधिक बुजुर्गों को इसका लाभ मिल सके। महासंघ ने यह भी मांग रखी है कि पेंशनर की मृत्यु होने पर परिवार को 50 हजार रुपए की अनुग्रह राशि (एक्सग्रेसिया) दी जाए। सरकार को दी बड़े आंदोलन की चेतावनी ज्ञापन सौंपने के दौरान पेंशनर्स ने सरकार को दो टूक चेतावनी दी कि यदि इन मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आने वाले समय में प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। महासंघ के अनुसार, उन्होंने अपनी 10 प्रदेशस्तरीय और 9 स्थानीय मांगों की सूची प्रशासन को सौंप दी है और अब वे आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
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