Marigold Cultivation: गेंदा की खेती ने बदली शिवपुरी के किसान की किस्मत, 1 बीघा में कमाए 1.5 लाख रुपये

Marigold Cultivation: गेंदा की खेती ने बदली शिवपुरी के किसान की किस्मत, 1 बीघा में कमाए 1.5 लाख रुपये


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Marigold cultivation: गेंदा की फसल में फूलों की आमद लंबे समय तक बनी रहती है. एक बार फूल आना शुरू होने के बाद लगभग 2 से 3 महीने तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है. हर 3-4 दिन में फूल तोड़ने से नई कलियों का विकास होता रहता है. त्योहारी सीजन, शादियों और धार्मिक आयोजनों में गेंदा की मांग अधिक रहती है. जिससे किसानों को नियमित आय मिलती रहती है. लंबे समय तक उत्पादन मिलने के कारण यह फसल किसानों के लिए स्थिर कमाई का साधन बनती है.

रिपोर्ट-आशीष पाण्डेय/ शिवपुरीः शिवपुरी जिले में आज भी अधिकांश किसान पारंपरिक खेती पर निर्भर है. जिससे उन्हें सीमित आय ही हो पाती है और परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो जाता है. लेकिन इसी शिवपुरी में कुछ प्रगतिशील किसान ऐसे भी है जो पारंपरिक खेती को छोड़ उन्नत कृषि तकनीक अपनाकर नई मिसाल कायम कर रहे है.

ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है शिवपुरी जिले के सालौदा गांव के किसान मोंटी कुशवाहा की. मोंटी बताते है कि उन्होंने पारंपरिक खेती लगभग छोड़ दी है और नगदी फसलों पर ध्यान देना शुरू किया है. उन्होंने सिर्फ 1 बीघा जमीन में गेंदा के फूल की खेती की और इससे करीब 1 से डेढ़ लाख रुपये तक की इनकम हासिल की.

मोंटी का कहना है कि गेंदा की खेती में ज्यादा परेशानी नहीं आती. लागत कम होती है और उत्पादन लगातार मिलता रहता है. बाजार में फूलों की नियमित मांग होने के कारण बिक्री भी आसानी से हो जाती है. वे बताते है कि नई तकनीक सही फसल चयन और मेहनत से कम जमीन में भी अच्छी आमदनी की जा सकती है.

मोंटी कुशवाहा की सफलता को देखकर अब सालौदा गांव के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती से हटकर नगदी फसलों की ओर रुख कर रहे है. उनका मानना है कि अगर किसानों के पास जमीन कम है. लेकिन मेहनत करने का जज्बा और नई तकनीक अपनाने की सोच है तो वे खेती में आगे बढ़ सकते है और अच्छा मुनाफा कमा सकते है.

कैसे लगाए गेंदा की फसल
गेंदा की खेती के लिए सबसे पहले अच्छी जल निकास वाली दोमट मिट्टी का चयन किया जाता है. खेत को 2-3 बार जुताई कर भुरभुरा बनाया जाता है. इसके बाद गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाई जाती है. नर्सरी में तैयार पौधों को 30×30 सेमी की दूरी पर रोपाई की जाती है. रोपाई के समय हल्की सिंचाई आवश्यक होती है. गेंदा की फसल में ज्यादा खाद और दवाइयों की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम रहती है. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करने से पौधों की बढ़वार अच्छी होती है.

फसल कितने दिन में हो जाती है तैयार
गेंदा की फसल जल्दी तैयार होने वाली नगदी फसल है. रोपाई के लगभग 45 से 50 दिनों के भीतर पौधों में फूल आना शुरू हो जाता है. पूरी फसल 60 से 70 दिनों में उत्पादन देने लगती है. यह फसल उन किसानों के लिए बेहद लाभकारी है जो कम समय में आमदनी चाहते है. समय पर सिंचाई और देखभाल से फूलों की गुणवत्ता अच्छी रहती है. कम अवधि में तैयार होने के कारण किसान एक ही साल में दूसरी फसल लगाने का भी मौका पा सकते है.

फसल में कब तक रहती है फूलों की आमद
गेंदा की फसल में फूलों की आमद लंबे समय तक बनी रहती है. एक बार फूल आना शुरू होने के बाद लगभग 2 से 3 महीने तक लगातार तुड़ाई की जा सकती है. हर 3-4 दिन में फूल तोड़ने से नई कलियों का विकास होता रहता है. त्योहारी सीजन, शादियों और धार्मिक आयोजनों में गेंदा की मांग अधिक रहती है. जिससे किसानों को नियमित आय मिलती रहती है. लंबे समय तक उत्पादन मिलने के कारण यह फसल किसानों के लिए स्थिर कमाई का साधन बनती है.

जगह छोटी, रेट कम फिर भी मुनाफा
हालांकि स्थानीय बाजार छोटा होने के कारण गेंदा के फूलों का रेट ज्यादा नहीं मिल पाता और औसतन ₹22 प्रति किलो के भाव से बिक्री होती है. फिर भी किसानों को अच्छा मुनाफा हो जाता है. इसका कारण यह है कि लागत बहुत कम आती है और उत्पादन लगातार मिलता रहता है. 1 बीघा में कुल खर्च निकालने के बाद भी किसान 1 से डेढ़ लाख रुपए तक की इनकम कर लेते है. कम जमीन वाले किसानों के लिए यह खेती आर्थिक रूप से बेहद फायदेमंद साबित हो रही है.

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गेंदा की खेती ने बदली शिवपुरी के किसान की किस्मत, 1 बीघा में कमाए 1.5 लाख



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